हमारे आस-पास के हीरो: दिग्गज रनर श्री महिपाल जी

 दिग्गज रनर श्री महिपाल जी को समर्पित




 आज महिपाल जी के बारे में एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूं कि किस तरह 60 साल की रिटायरमेंट की उम्र में इन्होंने सोसाइटी में चलना सीखा, दौड़े और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी रनिंग की दुनिया में एक रिकॉर्ड बना दिया।

ये ब्लॉग साधारण इंसान से असाधारण व्यक्तित्व बनने की ही कहानी नहीं है, बल्कि ये एक गहरा संदेश भी देती है कि अगर दिल की बात सुनी जाए, तो क्या किया जा सकता है।

बस उसके लिए एक जिद्द, एक समर्पण, कभी ना ठंडा होने वाला उत्साह, सर्दी-गर्मी-बरसात हर मौसम में अडिग रहने वाला एक उच्च कोटि का अनुशासन चाहिए, जिसकी जीती-जागती मिसाल हमारे अंतरराष्ट्रीय धावक महिपाल जी हैं।

उनके इस सफर में सच बताऊं तो पहले गोल्ड मेडल से ही साथ रहा हूं और उस समय भी एक छोटा आर्टिकल लिखा था। जेहन में एक बात उसी समय थी कि ये धावक अब रुकेगा नहीं, इस महान धावक को अभी बहुत कुछ हासिल करना है।

आज इनके बारे में लिखते हुए गर्व हो रहा है और खुशी इस बात की है कि मैं आपकी इस यात्रा का हिस्सा रहा। आपके इस सफर में मैंने जो अनुभव किया, उसे अब सभी को पूरे रिकॉर्ड के साथ अपनी भाषा में आप सभी के साथ साझा करने का मन है।

मुझे सच में नहीं पता कि अब क्या लिखने जा रहा हूं, किस तरीके से लिखने जा रहा हूं, पर इतना जरूर पता है कि दिमाग में चल रहे हजारों विचारों को सूचीबद्ध करके उसे इस तरह अवश्य आपके बीच रखूंगा कि महिपाल जी के बारे में पूरी जानकारी आपको मिल सके।

बिल्कुल शुरू से...

चलिए ज्यादा समय न लगाते हुए बात शुरू करता हूं, बिल्कुल शुरू से।महिपाल जी अटोर नंगला गाँव, गाजियाबाद के मूल निवासी हैं और वर्तमान में राजनगर एक्सटेंशन की गौर कैस्केड सोसाइटी में रहते हैं।                                                     (जब नेवी में थे तब की फोटो)

1981 से 1996 तक 15 साल इन्होंने नेवी में मेडिकल ब्रांच में ब्लड ट्रांसफ्यूजन असिस्टेंस के रूप में कार्य किया। मेडिकल के फील्ड में अच्छा ज्ञान रखते हैं—क्या खाना है, कब खाना है, किस खाने में कितना प्रोटीन है, कितना कार्बोहाइड्रेट है।

अच्छी जानकारी की वजह यह भी है कि इंटरनेट की दुनिया से जानकारी जुटाते रहते हैं और अपने आप को अपडेट करते रहते हैं।लगभग 33 साल की उम्र में  नेवी से 15 साल की सर्विस पूरी करने के बाद रिटायर होकर वापस आए । इन्होंने 1995 में ही नेवी की जॉब करते-करते मुंबई यूनिवर्सिटी से वकालत पूरी कर ली थी और अपना रजिस्ट्रेशन दिल्ली बार काउंसिल में करवा लिया था। 

पर शायद उनका वकील बनना नियति को मंजूर नहीं था। रास नहीं आया उन्हें ये काम। जिस काम में दिल ना लगे, उसे करके फायदा भी क्या। रास्ते, विकल्प कम नहीं थे।

परिवार को आर्थिक मजबूती देने के लिए इन्होंने 1996 में कुछ साइकिल रिक्शा लिए और रेंट पर देने का कार्य किया। भगवान की कृपा रही, काम चल निकला और बहुत सारे रिक्शा जब हो गए तो इन्होंने इसी का बड़ा काम शुरू किया। रिक्शा नए बनाकर भी बेचे।

बच्चों को पढ़ाया-लिखाया और जीवन सही चल रहा था। बच्चे डिग्री कर चुके थे और महिपाल जी की उम्र हो चुकी थी 60 साल और साल आ गया था 2021, पर इस महान धावक के लिए तो कुदरत ने पहले ही कुछ सोच रखा था।

जब अचानक जीवन में बहुत सारा समय आ गया

2019 के बाद आए Covid में बिजनेस में भी उठापटक रही, पर अपनी सारी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा कर दिया और दोनों बेटे B.Tech पढ़ चुके थे।

एक दिन उनका बड़ा बेटा बोला कि पापा, आपने हमारे लिए इतना कर दिया है, हम अब सक्षम हैं। आप दुकान बंद कर दीजिए और बाकी का जीवन आनंद से गुजारिए।

वैसे भी एक आम इंसान की उम्र 70 साल ही होती है। आपको भी ऐसा नहीं लगेगा कि जीवन काम करने में ही निकल गया, खुद के लिए समय नहीं दे पाया।

महिपाल जी को बेटे के उस अनुरोध में एक विश्वास दिखा और उन्हें भी लगा कि बेटा ठीक ही तो कह रहा है। चलो, खुशी की बात है कि बच्चे इस काबिल हो गए हैं तो कोई नहीं, बच्चों की बात माननी चाहिए।और उन्होंने अपनी रिक्शा वाली दुकान बंद कर दी।

आप कल्पना कीजिए उस इंसान की, जो नेवी की नौकरी करके, बिजनेस करके दिन में कभी ना सोया, ना आराम किया हो, उसे एकदम से इतना आराम मिल जाए तो बेचैनी होना लाजमी है।

आखिर करे तो करे क्या? समय कट ही नहीं रहा था। अपनी उम्र के साथियों के साथ  ताश तो नहीं खेल सकते थे। अब समय कटे तो कैसे कटे आखिर......

दस मिनट की वॉक से शुरू हुआ सफर

फिर महिपाल जी ने थोड़ा-थोड़ा सुबह-शाम सोसाइटी में ही घूमना शुरू किया। बस 10 मिनट लगभग। कोई टारगेट नहीं, बस समय निकालने और अपने आप को व्यस्त रखने के लिए।

आपको जानकर हैरानी होगी कि धीरे-धीरे कब वो 2 घंटे सुबह और 2 घंटे शाम वॉक करने लगे, इन्हें खुद पता नहीं चला।बस इन्हें चलना अच्छा लग रहा था। एक दिन मन में आया, चलो थोड़ा दौड़ता हूं। दौड़े सोसाइटी में और मुश्किल से एक चक्कर पूरा नहीं दौड़ पाए।

बस करते रहे कोशिश। उन्हें कौन सा मैराथन दौड़नी थी, जो इतना सोचते.....

समय अपनी गति से चलता रहा और महिपाल जी अपनी।

दौड़ना अब कुछ ज्यादा अच्छा लगने लगा था और सोसाइटी के कुछ चक्कर दौड़ने लगे थे। कोई भी टारगेट उनके दिमाग में दूर-दूर तक नहीं था, बस अपना समय काटने का बहाना था।

एक दिन ऐसा भी समय आया जब उन्होंने सोसाइटी के 16 चक्कर बिना रुके काट लिए। ये वाकई बड़ी बात थी, पर ये बात उन्हें कैसे पता चली, उसको भी बताता हूं। पर उससे पहले एक बात और जोड़ देता हूं।

फिट रहने की सोच

बात केवल टाइम काटने तक ही सीमित नहीं थी।

महिपाल जी ने बताया कि उनका बहुत समय अपने बीमार माता-पिता की सेवा में लगा है। उनके मन के किसी कोने में ये बात दबी हुई थी कि कुछ भी हो जाए, खुद फिट रहना है, बच्चों पर बोझ नहीं बनना है।

अगर हम ठीक रहेंगे तो बच्चों पर ना तो आर्थिक बोझ आएगा और ना उनको अपना काम छोड़कर हमें डॉक्टर्स के पास ले जाना पड़ेगा।आदमी विचारों से और उनको धरातल पर लाने से ही महान बनता है।

जब सोच इस उत्कृष्ट कोटि की हो तो ऐसी शख्सियत के लिए भगवान ने और क्या-क्या सोच रखा था, उस समय भी उन्हें कुछ नहीं पता था। पता था तो बस कि चलना है, दौड़ना है और फिट रहना है। बस।

वाकया इन्हीं की जुबानी सुनिए यूट्यूब वीडियो लिंक के माध्यम से 

https://youtu.be/TwPPaBCdU3M?si=xKrePxkEVOasnkYs


52 मिनट 5 सेकंड और एक नया सपना

16 चक्कर (10 km approx) का जब उन्होंने टाइम देखा तो वो लगभग 52 min 5 sec आया।

इंटरनेट पर जब उन्होंने 60+ age कैटेगरी की एक इवेंट 39th Master Athletics Championship के रिजल्ट पर गौर किया तो पता चला कि 60+ age कैटेगरी में 10 km में Gold 52 min 17 sec में पूरी करने वाले को मिला था।

बस फिर क्या था, उन्हें पता लग गया था कि वो अपनी age कैटेगरी में Gold लाने वाले से भी अच्छा दौड़ गए।

बस उसके बाद कहानी ने ऐसा मोड़ लिया, जिसे भारत की नहीं, पूरे विश्व को सुनना चाहिए।

अद्भुत... अकल्पनीय।

जब मंजिल दिखाई देने लगी

अब मानो जैसे एक पक्षी अपने पंख फड़फड़ा रहा था नीले गगन में उड़ने के लिए। एक रास्ता दिख गया था और बस मंजिल बेकरार थी उनसे मिलने के लिए। वो Gold Medal इस महिपाल जी के गले में आने के लिए आतुर रहे होंगे।
पर वो कहावत है ना—

सोचने से कहां मिलते हैं तमन्नाओं के शहर,
चलना भी जरूरी है मंजिलों को पाने के लिए....

बस फिर क्या था, महिपाल जी ने ठान लिया और निकल पड़े इसके बारे में पूरी जानकारी जुटाने। डिस्ट्रिक्ट गाजियाबाद लेवल पर पता किया, महामाया के स्पोर्ट्स सेक्रेटरी से बात की, अपने बारे में बताया। कोई अचीवमेंट नहीं था तब तक, था तो सिर्फ हौसला, वो भी आगे बढ़ने का।

पहला Official Event और पहला Gold

मंजिलें भी उन्हीं को मिलती हैं जो रास्ते खोजने की जिद्द रखते हैं।

रास्ता मिला महिपाल जी को गाजियाबाद डिस्ट्रिक्ट में महामाया स्टेडियम में हुई 2022 की 5 km और 10 km रेस में भाग लेकर।




आपको जानकर अचंभा होगा कि अपने जीवन की इस पहली Official Event में इन्होंने 5 km और 10 km की दौड़ में Gold Medal प्राप्त किया।और उससे बड़ी बात यह थी कि इसमें 60+ कैटेगरी की जगह 55+ कैटेगरी थी।


दूसरे शब्दों में समझाऊं तो ये कह सकते हैं कि उनकी फाइट 55 साल से ज्यादा के उन साथियों से हो रही थी जो इस दौड़ का हिस्सा थे।मतलब बिल्कुल साफ था कि अब हिंदुस्तान को 60+ age कैटेगरी में एक महान धावक मिल चुका है।
(कुछ इस तरह उठाया था महिपाल जी को, सब खुशी में झूमें थे नाचें थे) 

एक ऐसी कहानी की शुरुआत हो रही थी जिसका पहला पन्ना ही Gold Medal से खुला हो।

पहला National और कमियों की पहचान

उनकी इस अप्रत्याशित जीत ने खेल आयोजकों का दिल जीत लिया और Master Athlete National Championship Event के लिए इनका registration बिना State Event में हिस्सा लिए हो गया।अपनी पहली ही Event से National Event में कदम रखने वाले महिपाल जी अब एक नया इतिहास बनाने की ओर चल पड़े थे।


42th National Master Athlete Championship में इन्होंने Nov 2022 में हिस्सा लिया और 5 km में 10th position और 10 km में 7th position प्राप्त की।अपने पहले ही प्रयास में ये rank बहुत बढ़िया थी।

क्या कमियां थीं, महिपाल जी को पता चल चुका था। पहला तो उनका वजन और दूसरा और ज्यादा अभ्यास। बस इस Event के Gold पर इनकी नजर टिक गई थी।

फिल्म का ये डायलॉग फिट बैठता है कि अगर किसी चीज को शिद्दत से चाहो तो पूरी कायनात उसे तुमसे मिलाने की कोशिश में लग जाती है और महिपाल जी की शिद्दत में रत्तीभर कमी नहीं थी।

एक साधक की तरह चल रही थी तपस्या

धुन के पक्के महिपाल जी ने अपने वजन को न केवल कम किया बल्कि अपनी रनिंग टाइमिंग में काफी सुधार किया। महीनों लगे इस काम में।

सुबह-शाम ग्राउंड में घंटों रनिंग करते, पसीना बहाते, थक जाते, सोते, आराम करते, फिर दौड़ते....एक साधक की तरह, एक तपस्या चल रही थी उनकी।एक महान धावक तैयार हो रहा था उस ग्राउंड में।

एक बात पढ़ी थी कहीं, याद आ रही है कि जब महान धावक बन रहे होते हैं तो उन्हें कोई देख नहीं पाता, मतलब वो सुबह इतनी जल्दी उठ जाते हैं जब दुनिया सो रही होती है।

Gold की Hat-trick

जैसे किसी बच्चे ने एग्जाम की तैयारी करी हो खूब तो उसे परीक्षा का इंतजार रहता।महिपाल जी भी इंतजार कर रहे थे, पहले से बेहतर तैयारी और जोश के साथ। Jan 2023 में उत्तर प्रदेश Master Athlete Championship का आयोजन हुआ और महिपाल जी ने इस Event में भाग लेकर सिद्ध कर दिया कि अब Gold पर सही मायनों में वे हकदार हैं।


इस Event के 60+ age कैटेगरी के तीनों फॉर्मेट यानी 10 km, 5 km और 1500 मीटर में Gold की Hat-trick मारकर अपने इरादे बता दिए दुनिया को।कोई अब ये कदम रुकने वाले नहीं हैं....
जेहन में अभी ये लाइन याद आ रही है—

अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी है
अभी तो इस परिंदे का असली इम्तिहान बाकी है
अभी-अभी तो लांघा है समुद्रों को
अभी तो पूरा आसमा बाकी है

और रनिंग की दुनिया के आसमान में इस बाज ने अपनी और ऊंची उड़ान के लिए अपने पंख खोल लिए। आकाश भी ऐसी ऊंची उड़ान का साक्षी बनने को शायद बेकरार था.....

वाकया इन्हीं की जुबानी सुनिए यूट्यूब वीडियो लिंक के माध्यम से 
https://youtu.be/ZP47fUc_Xyc?si=GwgRB4qJG3OpsRNH

उपलब्धियों का शोर नहीं, सफलता का शोर

आगे बढ़ने से पहले वो बातें भी साझा करूंगा जो मैंने महसूस की उनकी इस यात्रा में। बहुत ही शांत प्रवृत्ति के महिपाल जी ने कभी अपनी उपलब्धियों का शोर नहीं किया। अगर मैं ये कहूं कि इन्होंने तैयारी इतनी खामोशी से की कि इनकी सफलता के शोर ने सबको बता दिया कि कौन हैं महिपाल जी।

ये मेडल 5 सालों की कमाई है , 200 से ज्यादा ये मेडल अपने आप में एक कहानी समेटे है। सभी मिलकर एक ऐसी दास्तां बता रहे है कि महिपाल जी ने हमें कमाया है , मिले नहीं है हम.... बहुत मेहनत की है इन्होंने।
           इवेंट ऑर्गेनाइजर द्वारा दिए गए सर्टिफिकेट 
ये Running BIB है, सारी की सारी सम्भाल कर रखी है इन्होंने।


                              No Excuse 


इनको मैंने उस बरसात  में दौड़ते देखा है जब कोई रनर ग्राउंड में आने से पहले 100 बार सोचे।

एक बार थोड़ा जल्दी ग्राउंड चला गया सर्दियों में। अंधेरा था काफी, कोहरा था, ठंड काफी थी। मैंने उस ग्राउंड में किसी को दौड़ते देखा तो सच में अचंभित रह गया। कोई और नहीं, वो तो हमारे गोल्डन बॉय महिपाल जी ही थे। पसीने से नहाए, इतनी सर्दी में बनियान में दौड़ते। सर्दी के गर्म कपड़ों की गर्माहट में मैं जब उनसे कहता कि अंकल जी, बस करो, ठंड ना लगवा लेना, तो कहते कि—“ठंड है कहां...”एक अलग ही मेंटल लेवल।

और उससे बड़ी बात कि खुद के सबसे बड़े दोस्त, खुद से कोई बहाना नहीं। रोज मतलब रोज।आंधी आए, तूफान आए, कुछ भी हो—नियम नियम ही है।उनके इस हौसले को नमन करता हूं।

National Gold का सपना पूरा हुआ
अपनी दूसरी National Master Athletics Championship 2023 में इन्होंने rank में सुधार किया और 10 km में Gold, 5 km में Silver और 1500 मीटर में 4th स्थान लिया और उनका National Championship Event में Gold का सपना भी पूरा हो गया।

वाकई महिपाल जी ने अपनी खुली आंखों से वो सपना देखा था जिसने उन्हें सोने नहीं दिया और वो सपना सोना मिलकर ही पूरा हुआ....

Gold की बौछार
आंकड़े देना नहीं चाहता मैं सभी Events के। ये ब्लॉग इनके आंकड़ों का संग्रह नहीं होगा, बल्कि इनके संघर्ष की वो दास्तां है जिसे हर कोई महसूस करे दिल से। उम्र 60 साल हो जाने  नीरस जीवन जीने वाले, समय को बस गुजारने वाले, जीवन शैली से उपजी बीमारियों को ठीक करने की कोशिश में ढेर सारी अंग्रेजी दवाई अपने शरीर को खिलाने वाले लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है महिपाल जी का जीवन।

Gold की बौछार का आइडिया आप इसी बात से लगा सकते हैं कि 2024 और 2025 में हुई District, State और National Championship Event के तीनों फॉर्मेट में इन्होंने Gold जीते, बस 1500 मीटर में Silver मिला। मतलब 18 Events में 17 में Gold
 (अब ये कदम रुकने वाले नहीं थे.....)

ये आंकड़े बयां कर रहे थे सालों की मेहनत, अनुशासन की पराकाष्ठा, एक अद्भुत कौशल, एक बस रोज थोड़ा और बेहतर करने के प्रयास।

आज जब पलटकर मैं अतीत के उन महिपाल जी को देखता हूं जिन्होंने केवल शौक-शौक में ही चलना शुरू किया था, आज उनके कदमों की आहट पूरा हिंदुस्तान सुन रहा था, देख रहा था।

विदेशी धरती पर भारतीय कौशल

अभी इनकी और ऊंची छलांग लगाना बाकी था।

इसीलिए Aug 2023 में दुबई में होने जा रही 8th International Games में संयुक्त भारतीय खेल फाउंडेशन की ओर से पहली बार विदेशी धरा पर भारतीय कौशल दिखाने का अवसर प्राप्त हुआ।

और सच मानिए कि इन शब्दों को लिखते हुए भावुक हूं कि इस अंतर्राष्ट्रीय Event में भी 10 km, 5 km और 1500 मीटर में Gold की ऐसी Hat-trick लगाई जिसकी धमक पूरे विश्व ने सुनी।
 

अब महिपाल जी केवल महिपाल नहीं रहे, अब International Gold Medalist बन चुके थे।

महिपाल जी की “B.Tech” वाली पढ़ाई

एक ऐसा रोचक वाकया याद आ रहा है जब महिपाल जी अपने बेटों को कहा करते थे—“देखो बेटा, जैसे आप लोगों ने 4 साल की B.Tech की डिग्री ली है ना, तो बिल्कुल ऐसे ही मेरी पढ़ाई चल रही है। एग्जाम देता हूं, पास हो जाऊंगा अच्छे नंबर्स से। बस चार साल बाद मेरा placement लग जाएगा, जैसे आप लोगों का लगा।”

उस समय ये बात किसी की ज्यादा समझ में नहीं आई।पर जब महिपाल जी देश के कोने-कोने में हो रही मैराथन Events में Gold लाने लगे , ईनाम की राशि मिलने लगी तो सच में उन्होंने सिद्ध कर दिया कि हौसले बड़े हों तो परिणाम भी बड़े होंगे।

सुनिएगा जरूर यूट्यूब पर शेयर किए गए लिंक के माध्यम से इस वाक्या की स्टोरी इन्हीं की जुबानी 

https://youtube.com/shorts/26AN-pu_GYs?si=oXsYfbYBT87J-mDf

लगभग हर रविवार एक नई दौड़

बात करूं मैराथन Events की तो 2022 से लगभग 60 Event दौड़ चुके हैं। लगभग सभी रविवार इनकी दौड़ रहती ही है। पहले 21 km में दौड़ना शुरू किया और Gold आने स्वाभाविक ही हो गए थे और उसके बाद Full Marathon में उतर गए और कहने की जरूरत नहीं है कि हर Event में Gold लेकर आने लगे।

ये कोई छोटी-मोटी Event नहीं होती थी। Procam जैसे बड़े बैनर के तले होने वाली अंतर्राष्ट्रीय स्तर की Event और बड़े-बड़े Event Organizers और ईनाम के रूप में मिलने वाली राशि उसी पैकेज का हिस्सा थी, जिसका किस्सा अभी शेयर किया।


(माउंट आबू में 51000 रुपए का चेक लेते हुए)

हर Event के बारे में जानकारी देना तो उचित नहीं है, पर जो इनका Best Time रहा, उसे आपके साथ साझा करूंगा।
Full Marathon 42 km — 3 hr 05 min 21 sec
Half Marathon 21 km — 1 hr 26 min 33 second
10 km Event                — 39 min 11 second

जब बच्चों ने महिपाल जी में अपना गुरु देखा

मुझे एक वाकया याद आ रहा है कि जब हमारा ग्रुप Fitness Freak एक Friendly Run के लिए आम के बगीचों वाली रोड पर पहुंचा और रन किया। तब वहां कुछ बच्चे शायद आर्मी की तैयारी करने के लिए दौड़ रहे थे। 


बातों-बातों में मैंने उन बच्चों को उनका 5 km का टाइम बता दिया—19 min, सुनते ही सब बच्चों ने उनके पैर छुए।
वजह साफ थी कि इस उम्र में ये टाइम, उनके लिए तो वो गुरु ही हुए।
वाकया इन्हीं की जुबानी सुनिए यूट्यूब वीडियो लिंक के माध्यम से 
https://youtube.com/shorts/4qJtBncvxWA?si=4Aj8lbY4TgNDGj06

सिर्फ Gold नहीं, उससे कहीं ज्यादा Golden बात

बातें तो इस ब्लॉग में सारी ही करूंगा महिपाल जी के बारे में, केवल Gold की नहीं, उससे कहीं ज्यादा Golden बात।ऐसा बिल्कुल नहीं है कि हर दिन आपका ही हो। रुकावटें भी जीवन का हिस्सा हैं और एक खिलाड़ी के जीवन में भी हार-जीत के रूप में उतार-चढ़ाव आते हैं। ऐसा ही एक वाकया और याद आ रहा है।

जब एक Event में Participate करने महिपाल जी गए थे और रात में होटल में उन्होंने अपने पैरों में swelling महसूस की। सोचा कोई बात नहीं, सुबह तक ठीक हो जाएगी, पर ऐसा हुआ नहीं। सूजन घटने की जगह और बढ़ गई। फैसला अब महिपाल जी को लेना था। दो ही रास्ते थे—रेस करना या छोड़ना। खिलाड़ी थे, हार कैसे मान लेते!
और इतनी दूर आए थे तो रन तो करना ही था।

दर्द भूलकर होटल से 2 km दूर स्टेडियम Running करते गए ताकि पैर को पता चले कि दौड़ना है, आज रुकना नहीं है। आपको अचंभा होगा कि उस Event में 55+ age कैटेगरी थी, competition तो कड़ा था और ऊपर से पैर की सूजन। 

पर महिपाल जी के जज्बे की जीत हुई और इस Event में भी इन्होंने Gold जीतकर सिद्ध कर दिया कि ठान लो तो मुश्किल कुछ भी नहीं।

जब Gold Medalist को एक सीट का सम्मान मिला

एक खूबसूरत वाकया और शेयर करता हूं।जब महिपाल जी लगभग हर रविवार दूसरे शहरों में आयोजित Event में भाग लेने जाते हैं तो कई सफर ट्रेन से करने पड़ते हैं। Waiting ही मिलती है टिकट कई बार। एक बार Waiting Ticket थी और सोचा कि क्यों ना आज अपना Running का Stardom दिखाकर  सीट ली जाए हालांकि उसका प्रभाव कम ही पड़ता है TTE पर, पर उस दिन कुछ और बात थी।
 


जब महिपाल जी ने अपने बारे में बताया कि वो International धावक हैं और अभी जो Event हुई है उसमें Gold जीतकर लौट रहे हैं तो TTE ने उन्हें आराम से बैठाया और उनकी जीत का सम्मान किया। एक सीट की व्यवस्था भी कर दी। महिपाल जी बता रहे थे, ऐसे TTE कम ही मिलते हैं।साधुवाद ऐसे TTE को भी, जो हमारे देश के Fitness Hero को सीट दी।
इस किस्से को इस यूट्यूब वीडियो के लिंक से सुनियेगा जरूर 

https://youtube.com/shorts/DvyDeH7ztLU?si=RpJkJnHq7xO_J-J7


महिपाल जी की फिटनेस का राज

बता दूं आप सभी को कि महिपाल जी शाकाहारी हैं और दिन में केवल चार बार खाना खाते हैं।सुबह दही और केला लेते हैं। 09:30 बजे 2 रोटी, दाल, सलाद और छाछ, दोपहर में mix dry fruits भीगे हुए और रात में 1 ग्लास दूध के साथ 4 खजूर। महिपाल जी बताते हैं कि वो केवल natural खाना खाते हैं। उसी के दम पर दौड़ते हैं।

उन्होंने बताया कि आजकल तो धावक steroid लेकर भी दौड़ रहे हैं। महंगे-महंगे running gel हर km पर पी रहे हैं, शरीर को नुकसान पहुंचा रहे हैं कुछ युवा धावक जो कि बिल्कुल गलत है। महिपाल जी की नजर में शाकाहार से बढ़िया कुछ नहीं। प्रोटीन की पूर्ति भी वो इसी माध्यम से कर लेते हैं और इस विषय का काफी ज्ञान उनके पास है।चाय, कॉफी, नमकीन, तला-भुना से दूर-दूर तक नाता नहीं है इनका।

मै एक बात यहां जोड़ता चाहूंगा कि बात डाइट की ही तो ऐसा नहीं है ये डाइट परफेक्ट है और इसे खाया तो गोल्ड आयेगा। हमारे शरीर के हिसाब क्या खाना चाहिए कब खाना चाहिए, सब इंटरनेट पर उपलब्ध है। 

 खाने के अलावा उस डेडीकेशन की है , उस जज्बे की है, उस अनुशासन की है जो बाहर बाज़ार में नहीं मिलता। जिसके बूते ये गोल्ड आए। 


“मेरी Biological Age 18 साल के लड़के की है”

एक बार रनिंग पूरी करने के बाद बोले कि मुझे ऐसा लगता है कि मेरी biological age 18 साल के लड़के की है।
उन्हें ऐसा ही महसूस होता है, हो भी क्यों ना, रेस में भी तो ये 18 साल के लड़कों को पीछे छोड़ रहे हैं। जो फोटो शेयर की है वो महिपाल जी की जवानी की फोटो है पर ये भी जोड़ूंगा कि अब वो तब से भी ज्यादा जवान है।
कुछ समय पहले GDA ने City Forest Ghaziabad में एक Running Event कराई थी। Open Category थी। उस Event में भी महिपाल जी Gold लाए थे और उनके competitor लड़के ही तो थे।

COVID के समय परिवार के साथ
Covid के समय महिपाल जी स्वस्थ रहे थे, पर जब परिवार को Covid ने घेर लिया तो उन्होंने खुद से ही treatment किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने पूरे परिवार को 4 बार नींबू पानी पिलाया, जिसमें 2 बार बिना नमक-चीनी के और 2 बार चीनी-नमक के दिया और पूरे परिवार को खुद से ठीक कर दिया।

अल्ट्रा मैराथन 75 KM 

31 मई 2026 को उत्तराखंड के रिमखिम माउंटेन में 14,890 फीट की ऊंचाई पर आयोजित 75 किलोमीटर की नीति एक्सट्रीम अल्ट्रा रन में महिपाल सिंह जी ने 60+ आयु वर्ग में दूसरा स्थान हासिल कर एक बार फिर साबित कर दिया कि हौसले के सामने उम्र छोटी पड़ जाती है। उन्होंने यह कठिन दौड़ 8 घंटे 46 मिनट 24 सेकंड में पूरी की और ₹50,000 की पुरस्कार राशि अपने नाम की। 14,890 फीट की ऊंचाई, कठिन पहाड़ी रास्ते और 75 किलोमीटर की लंबी दूरी—इन सबके बीच उनका यह प्रदर्शन सिर्फ एक पदक या पुरस्कार नहीं, बल्कि उनकी वर्षों की मेहनत, अनुशासन और कभी हार न मानने वाले जज़्बे की कहानी है।




2nd position Niti Xtreme Ultra Run 75 km

इस दौड़ में महिपाल जी ने कमाल ही कर दिया। जैसा आप देख रहे है कि मिली ट्राफी में एक  स्नो टाइगर एक बनियान में दौड़ रहा है , हमारे महिपाल जी माइनस 2 डिग्री टेम्प्रेचर में बनियान में ही दौड़ लगा आए। इतने हाई एलिवेशन पर, इस उम्र में , वाह! बहुत ही जबरजस्त या ये कहे सुपर से ही ऊपर वाली परफॉर्मेंस दी।

हिट एंड फिट कपल अपने अवॉर्ड के साथ


 
समाज के हर वर्ग से सम्मान मिला महिपाल जी को 


महिपाल जी के हौसले और जीत की कहानी, अखबारों की जुबानी

महिपाल जी की मेहनत और उपलब्धियाँ सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि उनकी बहादुरी और जज़्बे की कहानी प्रिंट मीडिया ने भी प्रमुखता से लोगों तक पहुँचाई। अलग-अलग अखबारों ने उनकी दौड़, पदकों और लगातार बेहतर प्रदर्शन को जगह देते हुए बताया कि किस तरह उम्र को पीछे छोड़कर महिपाल जी गोल्ड जीतने के अपने सफर को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी उपलब्धियाँ आज उन तमाम लोगों के लिए प्रेरणा बन रही हैं, जो मानते हैं कि उम्र बढ़ने के साथ सपने भी छोटे हो जाने चाहिए।







अंत में, 
आपके बारे में मैंने अपने विचार इस ब्लॉग के माध्यम से इस उम्मीद के साथ रखे है कि आपको लोग और करीब से जाने आपके सफर में देखे, महसूस करे जो शायद कोई डॉक्यूमेंट्री, प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया अभी तक ना बता पाया हो। मै अपने प्रयास में कितना खरा उतरा उसका पैमाना आप लोग है जो कमेंट के रूप में अपनी प्रतिक्रिया दे सकते है यदि इस स्टोरी ने आपके दिल को छुआ हो। 

दो लाइनों से इस ब्लॉग को विराम कि.....

तुझको चलना होगा... 
तुझको चलना होगा...
तू ना चलेगा तो चल देंगी राहें...
तुझको चलना ही होगा.........

 
इनका इंटरव्यू लिया था उसकी यूट्यूब वीडियो साझा कर रहा हूं।

https://youtu.be/5tJVwtKXTLc?si=Y19JRiLdGNa-O3Ka

लेखक 
अमित सिलावट 














Comments

  1. बहुत ही सुंदर लिखा अमित जी,
    वास्तव में श्री महिपाल जी हम सभी के लिए एक प्रेरणा स्रोत हैं।
    धन्यवाद अमित जी,
    आपने एक अनुकरणीय यात्रा को जो शब्दों और चित्रों में समायोजित किया है वह लाजवाब है। हम सभी श्री महिपाल जी के उत्तम स्वास्थ, दीर्घायु जीवन और उज्जवल भविष्य की कामना करते हैं।
    यशपाल एस जांगिड़

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    Replies
    1. भाईसाहब ,आपके हृदय से निकले इन शब्दों के लिए मैं सचमुच अभिभूत हूँ।

      महिपाल जी की यात्रा को शब्दों और चित्रों में समेटना मेरे लिए भी सिर्फ एक ब्लॉग लिखना नहीं था, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व से मिली प्रेरणा को दूसरों तक पहुँचाने की कोशिश थी, जिसने अपने जीवन के हर पड़ाव पर कर्म, अनुशासन और जज़्बे को जिया है।

      आप जैसे साथियों की प्रतिक्रिया यह एहसास कराती है कि यह कहानी लिखना सार्थक रहा। मेरी भी यही कामना है कि महिपाल जी सदैव स्वस्थ रहें, दीर्घायु हों और उनका जज़्बा हम सभी को यूँ ही प्रेरित करता रहे।

      आपके स्नेह और आशीर्वाद के लिए हृदय से धन्यवाद।
      सादर

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  2. अमित जी, इस ब्लॉग के लिए आपका धन्यवाद; अगर आप महिपाल सर के बारे में नहीं लिखते, तो हम कभी उनके बारे में नहीं जान पाते।
    सादर,
    प्रकाश गुप्ता

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    Replies
    1. प्रकाश जी, आपके इतने आत्मीय शब्दों के लिए दिल से धन्यवाद। 🙏
      सच कहूँ तो महिपाल सर जैसे व्यक्तित्व हमारे आसपास होते हुए भी अक्सर हमारी नजरों से अनदेखे रह जाते हैं। मुझे लगा कि उनकी संघर्ष, जज़्बे और जीवन-यात्रा को लोगों तक पहुँचाना चाहिए, ताकि उनकी कहानी सिर्फ मेरे तक सीमित न रहे।
      अगर इस ब्लॉग के माध्यम से कुछ लोग महिपाल सर को जान पाए और उनसे प्रेरणा ले पाए, तो मेरी मेहनत सार्थक है।

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