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एक अनसुनी कहानी

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एक अनसुनी कहानी कुछ मुलाकातें... जिंदगी बदलने वाली सीख दे जाती हैं कुछ लोग जिंदगी में बस कुछ पलों के लिए मिलते हैं, लेकिन जाते-जाते ऐसी बात कह जाते हैं जो लंबे समय तक हमारे भीतर चलती रहती है। पिछले दो दिनों से एक ऐसी ही मुलाकात मेरे मन में थी। लगा, इसे सिर्फ अपने तक रखना ठीक नहीं होगा। इसलिए आज आपसे साझा कर रहा हूँ। नाम नहीं बताऊँगा... पहचान भी नहीं बताऊँगा। बस उस इंसान की कहानी का एक छोटा-सा हिस्सा आपके सामने रख रहा हूँ। एक सुबह रनिंग के बाद मैं ग्राउंड में रुका था। वहीं करीब 38 साल के एक व्यक्ति बैठे थे। शरीर काफी कमजोर लग रहा था। मैं उनके पास बैठ गया और अपने रनिंग के बाद वाले वर्कआउट में लग गया। बातों-बातों में सहज ही पूछ लिया— “भाई, रनिंग कर चुके हो?” उन्होंने कहा— “नहीं भाई... रनिंग नहीं कर सकता। कुछ मेडिकल इश्यू है।” मुझे क्या पता था कि इस छोटे-से जवाब के बाद शुरू होने वाली बातचीत मुझे अंदर तक छू जाएगी। पूछने पर उन्होंने बताया कि उनकी किडनी खराब है और हफ्ते-दो हफ्ते में डायलिसिस होता है। उनके हाथों पर डायलिसिस की सूई के निशान साफ दिखाई दे रहे थे। उन्होंने ...

हमारे आस-पास के हीरो: दिग्गज रनर श्री महिपाल जी

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  दिग्गज रनर श्री महिपाल जी को समर्पित   आज महिपाल जी के बारे में एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूं कि किस तरह 60 साल की रिटायरमेंट की उम्र में इन्होंने सोसाइटी में चलना सीखा, दौड़े और अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भी रनिंग की दुनिया में एक रिकॉर्ड बना दिया। ये ब्लॉग साधारण इंसान से असाधारण व्यक्तित्व बनने की ही कहानी नहीं है, बल्कि ये एक गहरा संदेश भी देती है कि अगर दिल की बात सुनी जाए, तो क्या किया जा सकता है। बस उसके लिए एक जिद्द, एक समर्पण, कभी ना ठंडा होने वाला उत्साह, सर्दी-गर्मी-बरसात हर मौसम में अडिग रहने वाला एक उच्च कोटि का अनुशासन चाहिए, जिसकी जीती-जागती मिसाल हमारे अंतरराष्ट्रीय धावक महिपाल जी हैं। उनके इस सफर में सच बताऊं तो पहले गोल्ड मेडल से ही साथ रहा हूं और उस समय भी एक छोटा आर्टिकल लिखा था। जेहन में एक बात उसी समय थी कि ये धावक अब रुकेगा नहीं, इस महान धावक को अभी बहुत कुछ हासिल करना है। आज इनके बारे में लिखते हुए गर्व हो रहा है और खुशी इस बात की है कि मैं आपकी इस यात्रा का हिस्सा रहा। आपके इस सफर में मैंने जो अनुभव किया, उसे अब सभी को पूरे रिकॉर्ड के साथ अपनी भाषा में...

हमारे आसपास के हीरो: 107 किलो से Boston Marathon तक — अमित मक्कड़ जी की प्रेरणादायक कहानी

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🏃‍♂️ हमारे आसपास के हीरो 107 किलो से Boston Marathon तक — अमित मक्कड़ जी की कहानी                                कभी ऐसे थे               वर्तमान में इनका पुरस्कारों का साम्राज्य  आज आपसे एक ऐसे शख्स की कहानी शेयर करता हूं, जिसे पढ़कर आपको जरूर लगेगा कि सोच तो कोई भी सकता है, लेकिन उस सोच को धरातल पर उतारने का काम विरले ही कर पाते हैं। हमारे आसपास के हीरो की ब्लॉग सीरीज में आज एक नया नाम जोड़ रहा हूं। इस नाम से वैसे तो काफी साथी परिचित हैं, लेकिन उनकी फिटनेस यात्रा को आप सभी के साथ साझा करने का मन हुआ। वो शख्स हैं मिस्टर अमित मक्कड़ जी । मूल रूप से रोहतक, हरियाणा के रहने वाले अमित जी वर्तमान में इंदिरापुरम, गाजियाबाद में रहते हैं। उनका जन्म 1980 में हुआ। शुरुआत शुरू से ही करता हूं। बहुत बड़ा ब्लॉग तो नहीं होगा, लेकिन कोशिश रहेगी कि कहानी का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा छूटे नहीं और इस पूरी यात्रा का फिटनेस संदेश आप सभी तक जरूर पहुंचे।         ...