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अब फसल पकने लगी है… 🌾🚴‍♂️ | Nature Ride

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*अब फसल पकने लगी है....* रोज की तरह आज भी राइड पर निकला और सोचा कि आज अकेले राइड पर क्यो जाऊं, आप सभी साथियों को साथ लेकर चलता हूं, उस रूट को दिखा देता हूं कि वहां जाता क्यों हूं..... वजह एकदम साफ है क्योंकि वहां हवा साफ है, फसलें गुनगुनाने लगी है, पक्षियों की प्यारी बहस का हिस्सा बन जाते है, ट्यूबवेल भी बुला लेती है कि थक गए होंगे तो घूँट पानी पीकर जाना... दुहाई मेट्रो डिपो से सजधजकर निकलती नमो ट्रेन में यही संदेश देती हुई जाती है कि रुकना नहीं, चलना ही जिंदगी है..... वो जो आपकी साइकिल पर मकड़ी के जाले लगे है ना, उनको साफ करने का यही सही समय है, चलिए कभी राइड पर हमारे साथ... एक छोटी सी वीडियो साझा कर रहा हूं उम्मीद है पसंद आएगी आपको  https://youtube.com/shorts/JJwg1erWl9E?si=NyVLTIp4BQY_3gHZ

गिल्लू नहीं रहा

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गिल्लू नहीं रहा एक ऐसी कहानी सुनाता हूं आप सभी को जिसमें दुःख तो है किसी के जाने का, पर एक सीख भी है। बात शुरू करता हूं गिल्लू के किरदार से कि कौन है वह आखिर..... ये गिल्लू कोई और नहीं, एक बहुत ही प्यारा सा नन्हा जीव जिसकी अठखेलियां बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी इतनी ही प्यारी लगती हैं। जी, मैं बात कर रहा हूं गिलहरी की, जिसे प्रसिद्ध लेखिका महादेवी वर्मा ने गिल्लू के नाम से फेमस कर दिया। अक्सर सुबह-सुबह खेतों की ओर साइकिल लेकर निकल जाता हूं, खुद से, नेचर से बात करने.... मैंने मोर को नाचते देखा, नील गाय से बातें कीं, चिड़ियों की प्यारी डिसकशन सुनी, शायद कह रही हों कि रोज आना है हमें सुनने.... और वो गिल्लू अक्सर सड़क पार करता मिल जाया करता। बस उससे एक ही शिकायत थी कि जब आप निकल ही चुके हो और आधे से ज्यादा सड़क पार कर ही चुके हो तो बैक गियर क्यों लगाते हैं? चलो, पीछे भी हो गए तो अब तुरंत आगे बढ़ने की इतनी जल्दी क्यों है... कई बार गिल्लू जी साइकिल के पहिए के नीचे आते-आते बचे। पर किस्मत रोज तो मेहरबान होने से रही। कुछ दिन पहले सड़क पर गिल्लू का एक्सीडेंट हो गया। लगता था कि किसी ...

रटौल आम 🥭 : एक मीठी राइड के अनुभव

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जब किसी खास टॉपिक पर लिखना हो तो सबसे पहले विचार आता है कि शुरू कहां से करूं... बस इस टॉपिक को शुरू करने से पहले बचपन में पढ़ी वो चंद लाइन याद आ रही है कि जिस प्रकार गूंगा आम के स्वाद का गुणगान नहीं कर सकता, ठीक उसी तरह... था कुछ, जो टीचर समझाया करते थे। ये लाइन आम के लिए बिल्कुल सटीक फिट होती है। हो भी क्यों ना, आम है ही फल ऐसा। शायद यही वजह है कि आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि बचपन की गर्मियों, छुट्टियों, परिवार और मीठी यादों का भी हिस्सा है। हर किसी के जीवन में आम से जुड़ी कोई न कोई याद जरूर होती है। तभी तो फलों का राजा कहलाता है। बड़े-बड़े Mango Festival होते हैं। आम (फल) जब आम (साधारण) हो जाए तो कहने ही क्या... इसकी मिठास का कोई तोड़ नहीं। आप जब दिल खोलकर आम खाते हैं, फॉर्मल्टीज का चोला साइड में रखकर, तभी असली मजा है जनाब। गुठली भी कह पड़े, "अब तो शर्म करो कुछ... अब केवल मैं ही बची हूं..." आम के सीजन में आम तो हम सभी खाते हैं। बहुत वैरायटी आती है—चौसा, दशहरी, लंगड़ा आदि। पर आज मैं आपसे जिस आम की बात कर रहा हूं, वो जरा खास है, कुछ जुदा-जुदा है बाकी आमों से। मैं बा...

गोविंद जी की साइकिल

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  आस-पास के हीरो असाधारण लोग, असली कहानियाँ भाग–1 : गोविंद जी की साइकिल हमारे आसपास ऐसे अनेक लोग हैं जो बिना किसी प्रसिद्धि, पुरस्कार या पहचान के अपने जीवन से दूसरों को प्रेरित करते हैं। यह श्रृंखला उन्हीं असली हीरो को समर्पित है, जिनकी कहानियाँ अक्सर सुर्खियों में नहीं आतीं, लेकिन लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहती हैं।"   दोस्तों आज मैं आपके साथ एक ऐसी स्टोरी शेयर करूंगा जिसमें मैंने फर्श से अर्श तक का सफर अपनी आँखो के सामने देखा है। एक ऐसे शख्स की कहानी जिसे पढ़कर आपको लगेगा कि ऐसा भी हो सकता है क्या.....  इस टॉपिक को लिख तो रहा हूं और केंद्र में गोविंद जी और उनकी साइकिल मस्तिक पटल पर इस तरह छपी है कि हजारों भाव है मन के , बस उन्ही को एक सिरे से पिरोना है और आपके सामने वो प्रस्तुत करना है जिसके लिए ये शख्स वास्तव में हकदार है।  सच बोलूं तो फिटनेस मिशन को शुरू किए लगभग 8  साल हो चुके है और बहुत साथियों के साथ जुड़ा , बहुतों को जोड़ा , कारवां बड़ा हुआ और हौसला भी.... कई साथियों ने फिटनेस के फील्ड में अपना लोहा मनवाया। मेरे मन में कई बार एक विचार आता ह...