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Showing posts from July, 2026

रटौल आम 🥭 : एक मीठी राइड के अनुभव

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जब किसी खास टॉपिक पर लिखना हो तो सबसे पहले विचार आता है कि शुरू कहां से करूं... बस इस टॉपिक को शुरू करने से पहले बचपन में पढ़ी वो चंद लाइन याद आ रही है कि जिस प्रकार गूंगा आम के स्वाद का गुणगान नहीं कर सकता, ठीक उसी तरह... था कुछ, जो टीचर समझाया करते थे। ये लाइन आम के लिए बिल्कुल सटीक फिट होती है। हो भी क्यों ना, आम है ही फल ऐसा। शायद यही वजह है कि आम सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि बचपन की गर्मियों, छुट्टियों, परिवार और मीठी यादों का भी हिस्सा है। हर किसी के जीवन में आम से जुड़ी कोई न कोई याद जरूर होती है। तभी तो फलों का राजा कहलाता है। बड़े-बड़े Mango Festival होते हैं। आम (फल) जब आम (साधारण) हो जाए तो कहने ही क्या... इसकी मिठास का कोई तोड़ नहीं। आप जब दिल खोलकर आम खाते हैं, फॉर्मल्टीज का चोला साइड में रखकर, तभी असली मजा है जनाब। गुठली भी कह पड़े, "अब तो शर्म करो कुछ... अब केवल मैं ही बची हूं..." आम के सीजन में आम तो हम सभी खाते हैं। बहुत वैरायटी आती है—चौसा, दशहरी, लंगड़ा आदि। पर आज मैं आपसे जिस आम की बात कर रहा हूं, वो जरा खास है, कुछ जुदा-जुदा है बाकी आमों से। मैं बा...

गोविंद जी की साइकिल

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  आस-पास के हीरो असाधारण लोग, असली कहानियाँ भाग–1 : गोविंद जी की साइकिल हमारे आसपास ऐसे अनेक लोग हैं जो बिना किसी प्रसिद्धि, पुरस्कार या पहचान के अपने जीवन से दूसरों को प्रेरित करते हैं। यह श्रृंखला उन्हीं असली हीरो को समर्पित है, जिनकी कहानियाँ अक्सर सुर्खियों में नहीं आतीं, लेकिन लोगों के दिलों में हमेशा ज़िंदा रहती हैं।"   दोस्तों आज मैं आपके साथ एक ऐसी स्टोरी शेयर करूंगा जिसमें मैंने फर्श से अर्श तक का सफर अपनी आँखो के सामने देखा है। एक ऐसे शख्स की कहानी जिसे पढ़कर आपको लगेगा कि ऐसा भी हो सकता है क्या.....  इस टॉपिक को लिख तो रहा हूं और केंद्र में गोविंद जी और उनकी साइकिल मस्तिक पटल पर इस तरह छपी है कि हजारों भाव है मन के , बस उन्ही को एक सिरे से पिरोना है और आपके सामने वो प्रस्तुत करना है जिसके लिए ये शख्स वास्तव में हकदार है।  सच बोलूं तो फिटनेस मिशन को शुरू किए लगभग 8  साल हो चुके है और बहुत साथियों के साथ जुड़ा , बहुतों को जोड़ा , कारवां बड़ा हुआ और हौसला भी.... कई साथियों ने फिटनेस के फील्ड में अपना लोहा मनवाया। मेरे मन में कई बार एक विचार आता ह...

ट्यूबवेल राइड

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चलिए शुरू करता हु आज की इस अनोखी राइड की कहानी और बार बार बताने की ज़रूरत बिल्कुल नहीं होगी कि दिल से निकले शब्द है ये।  इवेंट चल रही है 50 दिन वाली मल्टीस्पोर्ट इवेंट को तो आज उठा लिया साइकिल को और सुबह सुबह सोचा किसको साथ ले चलूं तो सोसाइटी के ही एक मित्र को फोन करके मनाया और निकल पड़े गांव की और..... ।             ये लोकेशन मुझे बड़ी अच्छी लगी  थोड़ा चलते ही महसूस हुआ कि साथी धीरे चल रहा है, देखा तो पता चला टायर में हवा कम है , हम बोले चिंता न करो, ये चलाओ हमारी साइकिल, बस आगे ही है, हवा मिल जाएगी, आपकी साइकिल मै चला लेता हूं।होनी को भला कौन टाल पाया है, जैसे तैसे पहुंचे, तो देखा दुकान बंद, खैर मन में यही विचार थे कि आज ये क्या पंगा ले लिया । वापिस तो जाने का सवाल हो पैदा नहीं होता था और मित्र बोल रहा था , जल्दी चलो , स्पीड इतनी कि पैदल यात्री भी शरमा जाए। गिरते पड़ते 5 km चलाई साइकिल खेतों के बीच से होते हुए, नजारा शानदार था तो सफर कट गया। दुकान क्या जान में जान आई। पर किस्मत में अभी भी हमारी साइकल का साथ नहीं लिखा था तो मित्र...