हमारे आसपास के हीरो: 107 किलो से Boston Marathon तक — अमित मक्कड़ जी की प्रेरणादायक कहानी
🏃♂️ हमारे आसपास के हीरो
107 किलो से Boston Marathon तक — अमित मक्कड़ जी की कहानी
आज आपसे एक ऐसे शख्स की कहानी शेयर करता हूं, जिसे पढ़कर आपको जरूर लगेगा कि सोच तो कोई भी सकता है, लेकिन उस सोच को धरातल पर उतारने का काम विरले ही कर पाते हैं।
हमारे आसपास के हीरो की ब्लॉग सीरीज में आज एक नया नाम जोड़ रहा हूं। इस नाम से वैसे तो काफी साथी परिचित हैं, लेकिन उनकी फिटनेस यात्रा को आप सभी के साथ साझा करने का मन हुआ।
वो शख्स हैं मिस्टर अमित मक्कड़ जी। मूल रूप से रोहतक, हरियाणा के रहने वाले अमित जी वर्तमान में इंदिरापुरम, गाजियाबाद में रहते हैं। उनका जन्म 1980 में हुआ।
शुरुआत शुरू से ही करता हूं। बहुत बड़ा ब्लॉग तो नहीं होगा, लेकिन कोशिश रहेगी कि कहानी का कोई महत्वपूर्ण हिस्सा छूटे नहीं और इस पूरी यात्रा का फिटनेस संदेश आप सभी तक जरूर पहुंचे।
फर्क ऐसा कि साफ दिखाई दे.......2015 — जब जिंदगी ने दस्तक दी
जिस शख्स का आप फोटो देख रहे हैं, यह अमित मक्कड़ जी का वर्ष 2015 का फोटो है। वजन लगभग 107 किलो रहा होगा।
कॉरपोरेट जॉब, पांच दिन की वर्किंग की टेंशन और फिर दोस्तों के साथ वीकेंड पर get-together करके जिंदगी की भागदौड़ को भूलने की कोशिश... जिंदगी वैसे ही चल रही थी, जैसी अमूमन हममें से बहुत से लोगों की चलती है।
दिन बढ़ रहे थे और जीवनशैली के कारण वजन भी बढ़ रहा था। लेकिन शायद उस समय अमित जी के लिए यह कोई बहुत बड़ा मुद्दा नहीं था।
फिर समय बदला।
समय सभी की जिंदगी में दस्तक देता है। फर्क सिर्फ इतना है कि कोई उस दस्तक को सुन लेता है और कोई सुनकर भी अनसुना कर देता है।
एक बार उनकी कॉरपोरेट कंपनी में हेल्थ चेकअप कैंप लगा।
(इंटरनेट की दुनिया से लिया एक प्रतीकात्मक फोटो)
अमित जी ने भी अपना चेकअप कराया।
चेक करने वाले ने कहा—
“आप अभी साइड में बैठ जाइए, आपका BP थोड़ा ज्यादा है। डॉक्टर साहब आपको चेक करेंगे।”
डॉक्टर ने भी स्थिति को गंभीरता से लेते हुए बस इतना कहा कि खतरा है... इसे टाला जा सकता है, लेकिन अपनी सेहत पर ध्यान दीजिए।
शायद ये कुछ शब्द ही थे, लेकिन उस दिन से ये अमित जी के कानों में लगातार गूंजते रहे।
और फिर उन्होंने खुद से एक फैसला किया—
“नहीं... अब और नहीं। कुछ करना होगा।”
एक शुरुआत — खुद से किए वादे की
इंदिरापुरम के स्वर्णजयंती पार्क की पगडंडियों और सड़कों पर walking शुरू हुई।
फिर थोड़ी-थोड़ी running।
बस यही छोटी सी शुरुआत थी... लेकिन असल में यह शुरुआत दौड़ने की नहीं, खुद से किए गए एक वादे को निभाने की थी।
ब्लॉग लिखते-लिखते मेरे दिमाग में भी एक लाइन चल रही है—
मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं,
जिनके सपनों में जान होती है...
पंखों से कुछ नहीं होता,
हौसलों से उड़ान होती है।
उसी हौसले के साथ अमित जी के उठे कदमों ने आगे क्या हासिल किया, अब उसी सफर की बात करते हैं।
जब एक मोटिवेटर मिला
इस सफर में अमित जी को मोटिवेशन मिला उनकी ही कंपनी India Bulls के MD श्री गगन बंगा जी से, जो स्वयं भी फिटनेस enthusiast थे और हर साल Tata Mumbai Marathon में हिस्सा लेते थे।
अमित जी उनसे प्रभावित थे। उन्होंने उन्हें बधाई दी और अपने मन का एक सपना बताया—
“सर, नवंबर 2015 में मुझे Vedanta Delhi Marathon में Half Marathon यानी 21 KM दौड़ना ही है।”
जब वादा किसी और से नहीं, खुद से किया गया हो, और उसे निभाने की शिद्दत हो, तो सपने पूरे होने लगते हैं।
29 नवंबर 2015 को अमित मक्कड़ जी ने Vedanta Delhi Marathon में अपना पहला Half Marathon 2 घंटे 24 मिनट में पूरा किया।
अगर आप धावक हैं तो समझ सकते हैं कि एक ऐसे व्यक्ति के लिए, जिसने कुछ समय पहले ही अपनी फिटनेस यात्रा शुरू की थी, यह कितनी बड़ी उपलब्धि थी।
लेकिन कहानी यहीं रुकने वाली नहीं थी।
नवंबर 2016 में एक और Half Marathon में उन्होंने समय घटाकर 1 घंटे 56 मिनट कर दिया।
अब साफ था—
अमित मक्कड़ जी रुकने वाले नहीं थे।
2017 — जब खेल बदलने लगा
नया साल आया, नई उम्मीदें आईं और नए challenges भी।
यह साल अमित जी की fitness journey में एक तरह से game changer साबित हुआ।
उन्होंने लगभग दो महीने तक कोच संजय दसीला जी से ट्रेनिंग ली।
और फरवरी 2017 में New Delhi Marathon के बैनर तले Half Marathon को मात्र 1 घंटे 41 मिनट में पूरा किया।
2015 में 2:24...
2016 में 1:56...
और 2017 में 1:41
यानी हर साल अपने ही समय को चुनौती देना और खुद को बेहतर बनाना।
बात जब उनकी कंपनी के MD श्री गगन बंगा जी तक पहुंची तो उन्होंने अमित जी को मुंबई में आयोजित फिटनेस इवेंट Puma Urban Stampede में बुलाया।
मार्च 2017 में आयोजित इस इवेंट में India Bulls की टीम First Runner-up रही।
शुरुआत हो चुकी थी...
और हौसलों को अब सच में उड़ान मिल रही थी।
🏆 107 किलो से Full Marathon तक
अब कुछ आंकड़े दे रहा हूं।
बस एक बार फिर उस 2015 के फोटो को जेहन में रखिए और इन आंकड़ों पर गौर कीजिए—
Tata Mumbai Marathon
January 2018
Full Marathon — 3 घंटे 38 मिनट
New Delhi Marathon
February 2019
Full Marathon — 3 घंटे 28 मिनट
10 मिनट कम।
New Delhi Marathon
February 2021
Full Marathon — 3 घंटे 18 मिनट
2020 में कोविड के कारण इवेंट नहीं हुई थी।
फिर से 10 मिनट कम।
New Delhi Marathon
February 2022
Full Marathon — 3 घंटे 12 मिनट
फिर 6 मिनट कम।
हर बार कोई बड़ा चमत्कार नहीं हुआ।
बस वही हुआ जो जिंदगी में अक्सर सबसे मुश्किल होता है—
लगातार मेहनत और लगातार खुद को बेहतर करने की कोशिश।
ठान लिया खुद से , तो जीत पक्की है
🇺🇸 Boston Marathon Qualification — सपना अब अंतरराष्ट्रीय हो चुका था
जब लक्ष्य बड़े हों तो साधना भी बड़ी करनी पड़ती है।
अमित मक्कड़ जी की साधना रंग लाई।
Adani Ahmedabad Marathon में उन्होंने Full Marathon को 3 घंटे 08 मिनट में पूरा किया और Boston Marathon के लिए qualify किया।
बताता चलूँ कि बोस्टन क्वालीफाई समय 3 घंटे 10 मिनट होता है।
यह अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि थी।
लेकिन मेरे हिसाब से इससे भी बड़ी उपलब्धि कुछ और थी—
खुद से किया हुआ वादा पूरा करना।
जरा सोचिए...
2015 में लगभग 107 किलो वजन।
फिर walking और थोड़ी-सी running से शुरुआत।
और कुछ वर्षों बाद...
3 घंटे 08 मिनट की Marathon और Boston Qualification!
जनवरी 2018 में पहली Full Marathon से लेकर नवंबर 2022 में Boston Qualification तक लगभग पांच साल की लगातार मेहनत ने यह मुकाम हासिल करवाया।
सोचना और करना वास्तव में दो अलग बातें हैं।
जो दोनों को करने की शक्ति रखते हैं, वही सही मायनों में हीरो होते हैं।
❤️ जब अपनी मंजिल के बाद दूसरों की मंजिल बनाने निकल पड़े
लेकिन अमित मक्कड़ जी की कहानी की खूबसूरती यहीं खत्म नहीं होती।
बाद में उन्होंने अपने इस passion को पूरी तरह follow करने के लिए Oct 2024 में कॉरपोरेट जॉब को अलविदा कह दिया।
और अपने फिटनेस साथियों मोहित माथुर जी, अरुण पूनिया जी, शिखा जैन जी, बलवंत जी, महेंद्र जी आदि के साथ मिलकर Marathon Sports Hub की नींव रखी।
आज इस बैनर के तले लगभग 20 fitness events आयोजित किए जा चुके हैं।
यानी जिस इंसान ने कभी अपनी जिंदगी बदलने के लिए running शुरू की थी, आज वही दूसरों की जिंदगी में भी फिटनेस के रंग भरने का काम कर रहा है।
शायद यही किसी भी फिटनेस journey की सबसे खूबसूरत मंजिल होती है।
अब खुद दौड़ने से आगे — दूसरों को दौड़ाने का सफर
अमित मक्कड़ जी सिर्फ marathon runner ही नहीं रहे, बल्कि उन्होंने इस खेल को समझकर दूसरों की marathon journey में भी अपना योगदान देना शुरू किया।
Tata Mumbai Marathon — January 2025
Full Marathon में 4:30 घंटे के Official Pacer
New Delhi Marathon — February 2025
4 घंटे के Official Pacer
और अभी हाल ही में उन्हें Indian Air Force Marathon, Guwahati का Race Director भी नियुक्त किया गया है।
आज तक अमित मक्कड़ जी 100 से ज्यादा Half Marathons और 20 से ज्यादा Full Marathons दौड़ चुके हैं।
(वर्तमान में इनकी उम्र 46 साल और वजन 75 kg है)
साथ ही वे Marathon की training भी करवाते हैं और बहुत से साथियों का Marathon का सपना पूरा करवाने में पूरा साथ देते हैं।
हो भी क्यों न...
शायद एक runner से बेहतर दूसरे runner के दिल की बात कौन समझ सकता है।
🌟 अमित मक्कड़ जी — आप हमारे आसपास के हीरो हैं
अमित मक्कड़ जी,
इस ब्लॉग के अंतिम पड़ाव पर बस यही कहना चाहता हूं कि आप जैसे जुझारू साथी ही वो कलाकार हैं, जो किसी के जीवन में फिटनेस के रंग भरने की शक्ति रखते हैं।
आपकी कहानी सिर्फ 107 किलो से 3:08 की Marathon तक पहुंचने की कहानी नहीं है।
यह कहानी है—
डर से फैसले तक,
फैसले से मेहनत तक,
मेहनत से उपलब्धि तक,
और उपलब्धि से दूसरों को प्रेरित करने तक।
मैं ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि आप उत्तम स्वास्थ्य के साथ इसी तरह लोगों को फिटनेस के लिए motivate करते रहें।
और आपकी यह छोटी-सी कहानी उन तमाम लोगों को जरूर motivate करे, जो आज भी यह सोचते हैं—
“अब मुश्किल है...”
क्योंकि अमित मक्कड़ जी की कहानी शायद उनसे कहेगी—
मुश्किल जरूर है...
लेकिन नामुमकिन नहीं।
और इन्हीं शब्दों के साथ इस कहानी को विराम देता हूं—
गर टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना,
बिना मेहनत के हासिल तख्तो-ताज नहीं होते।
और ढूंढ लेते हैं अंधेरे में भी मंजिल अपनी,
क्योंकि जुगनू कभी रोशनी के मोहताज नहीं होते। 🏃♂️❤️
Very Nice are really Motivating, Makkar Jee is really a great motivator
ReplyDeleteThanks Deep Ji, Means a lot
Deleteअमित जी,
ReplyDeleteदिल से धन्यवाद! ❤️🙏
मेरी इस यात्रा को इतनी खूबसूरती से शब्दों में पिरोना मेरे लिए किसी सम्मान से कम नहीं है।
107 किलो से शुरू हुआ यह सफर सिर्फ वजन कम करने या मैराथन दौड़ने का सफर नहीं था… यह खुद को बदलने, खुद से किए वादे निभाने और हर दिन थोड़ा बेहतर बनने की कोशिश थी।
लेकिन इस कहानी की सबसे खूबसूरत बात शायद यह है कि जो दौड़ कभी मैंने अपने लिए शुरू की थी, आज उसी के जरिए दूसरों के सपनों को पूरा करने का अवसर मिल रहा है। यही मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धि है। ❤️
आपने मुझे “हमारे आसपास का हीरो” कहा, लेकिन सच कहूँ तो इस सफर में मिले हर साथी, हर दोस्त, हर runner और हर उस व्यक्ति का योगदान है जिसने किसी न किसी मोड़ पर मेरा हौसला बढ़ाया।
आपकी लेखनी ने सिर्फ मेरी कहानी नहीं लिखी, बल्कि शायद उन लोगों तक एक उम्मीद पहुँचाई है जो आज अपनी जिंदगी में बदलाव लाने की शुरुआत करने से डर रहे हैं।
बस यही संदेश है —
शुरुआत छोटी हो सकती है, लेकिन अगर इरादे मजबूत हों तो मंज़िल कितनी भी बड़ी क्यों न हो, रास्ता जरूर निकलता है।
एक बार फिर दिल से शुक्रिया अमित जी।
आपने मेरी कहानी को सिर्फ लिखा नहीं… उसे महसूस किया है। ❤️🙏🏃♂️
Keep inspiring, keep spreading stories that inspire.
अरे भाई, शुक्रिया कैसा 🙏 आपकी मेहनत और जज़्बा ही इतना खास है कि कहानी अपने आप बन गई। मैंने तो बस दिल की बात शब्दों में लिख दी। आपकी कहानी पढ़कर अगर एक इंसान भी अपने बदलाव की शुरुआत कर दे, तो समझो लिखना सार्थक हो गया। ❤️🏃♂️
ReplyDeleteVery inspiration man , he is not a coach , he is a motivation buddy for running as well as helping person.
ReplyDeleteThis comment has been removed by the author.
ReplyDeleteबस नाम ही काफी है…
ReplyDeleteजब एक अमित, दूसरे अमित के बारे में लिखता है, तो उन शब्दों में केवल प्रशंसा नहीं होती, बल्कि एक अमित की दूसरे अमित के व्यक्तित्व को पहचानने की दृष्टि भी दिखाई देती है। वास्तव में, हीरे की परख एक जौहरी ही कर सकता है।
और जब स्वयं कोई व्यक्ति मोटिवेटर हो, जिसने अनेकों लोगों को—मेरे जैसे लोगों को भी—एक कमरे से निकलकर सड़क पर दौड़ने के लिए प्रेरित और विवश कर दिया हो, तो उसकी प्रेरणा की ताकत को शब्दों में बयां करना आसान नहीं।
मैं आज अमित सिलावट जी का हृदय से धन्यवाद करता हूँ।
इसके बाद जब मेरी मुलाकात अमित मक्कार जी से हुई, तो उनके चेहरे की मुस्कुराहट और सहज हँसी ऐसी है, जो बरबस ही व्यक्ति को उनके साथ जुड़ने और उनका साथ देने के लिए प्रेरित करती है।
मैं अमित सिलावट जी को बहुत-बहुत बधाई देता हूँ, जिन्होंने इतने शानदार शब्दों में पिरोकर अमित मुखर्जी जी की प्रेरणादायक यात्रा को एक सुंदर माला के रूप में हम सबके सामने प्रस्तुत किया।
और अमित मक्कार जी के लिए मैं बस इतना कहना चाहता हूँ—
अभी तो खोले हैं पंख हमने, अभी उड़ान बाकी है,
अभी तो नापी है कुछ गज ज़मीन हमने,
अभी तो पूरा आसमान बाकी है।
मैं यशपाल एस. जांगिड़, मेरठ की ओर से दोनों अमित भाइयों को हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ देता हूँ।
आप दोनों अपनी लेखनी से भी और अपने कर्मों से भी जिस तरह लोगों को प्रेरित कर रहे हैं, वह वास्तव में अनुकरणीय है और हम सभी के लिए अनुसरणीय भी।
ईश्वर से मेरी प्रार्थना है कि आप दोनों को उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर सफलता प्रदान करें तथा आपको वह शक्ति दें, जिसके बल पर आप सदैव दूसरों को प्रेरित करते रहें और उनके लिए प्रेरणास्रोत बने रहें।
हार्दिक शुभकामनाओं सहित।
यशपाल एस. जांगिड़
मेरठ
शुभ रात्रि 🙏
ReplyDeleteआदरणीय यशपाल भाईसाहब, आपके दिल से निकले शब्दों ने सच में दिल छू लिया। इतनी खूबसूरती से आपने हम दोनों को शुभकामनाएं दीं, इसके लिए दिल से धन्यवाद भाई।
अमित मक्कड़ जी की यात्रा लिखना मेरे लिए भी खुशी और गर्व की बात थी। आपका स्नेह और आशीर्वाद हम दोनों के लिए बहुत मायने रखता है।
बस यूं ही प्यार और आशीर्वाद बनाए रखिए। 🙏