ट्यूबवेल राइड
चलिए शुरू करता हु आज की इस अनोखी राइड की कहानी और बार बार बताने की ज़रूरत बिल्कुल नहीं होगी कि दिल से निकले शब्द है ये। इवेंट चल रही है 50 दिन वाली मल्टीस्पोर्ट इवेंट को तो आज उठा लिया साइकिल को और सुबह सुबह सोचा किसको साथ ले चलूं तो सोसाइटी के ही एक मित्र को फोन करके मनाया और निकल पड़े गांव की और.....
थोड़ा चलते ही महसूस हुआ कि साथी धीरे चल रहा है, देखा तो पता चला टायर में हवा कम है , हम बोले चिंता न करो, ये चलाओ हमारी साइकिल, बस आगे ही है, हवा मिल जाएगी, आपकी साइकिल मै चला लेता हूं।होनी को भला कौन टाल पाया है, जैसे तैसे पहुंचे, तो देखा दुकान बंद, खैर मन में यही विचार थे कि आज ये क्या पंगा ले लिया । वापिस तो जाने का सवाल हो पैदा नहीं होता था और मित्र बोल रहा था , जल्दी चलो , स्पीड इतनी कि पैदल यात्री भी शरमा जाए। गिरते पड़ते 5 km चलाई साइकिल खेतों के बीच से होते हुए, नजारा शानदार था तो सफर कट गया। दुकान क्या जान में जान आई। पर किस्मत में अभी भी हमारी साइकल का साथ नहीं लिखा था तो मित्र ही चलाते रहे, स्पीड बढ़िया था और सफर चल रहा था। टारगेट था वैसे आज 15 km, चलते रहे खेतों के बीच से निकलते निकलते और रास्ते में मिली एक ट्यूबवेल। भला फिर कैसे रोक पाते अपने आप को।
लगा ली डुबकी और ले ली बहुत सारी यादगार फोटो।
यही विचार चल रहे थे कि देखिए घर से चंद km पर ही तो है ये नज़ारे, जिसे देखने का सौभाग्य कुछ चंद लोगों को नसीब होता है, पानी के मीठे शोर ने , दूर दूर तक फैली हरियाली भला किसका मन ना मोह ले। दोस्त से बता रहा था कि इस दुनियां में मजा बिखरा पड़ा है ,इसे समेटने वाले ही नहीं है। अक्सर कई साथी पूछ लेते है कि समय कैसे निकाल लेते है, तो बस इतना ही बोल देते है कि सारा गेम प्रायरटी का है, हम किसे कितनी इंपोर्टेंस देते है बस......
अच्छा एक बात और भी है जिस दिन off होता है तो उस दिन टाइम का प्रेशर बिल्कुल नहीं होता, ईजी राइड का अपना अलग ही आनंद है। अधिकतर अकेले ही राइड पर निकल जाता हूं और राइड का मतलब 21 km माइंड में सेट है , उससे कम भी भला क्या राइड.... कुछ साथी जब पूछते है कि कौन गया था साथ में, तो बोल देता हूं कि हम दोनों थे तो पूछते है दूसरा कौन..... जवाब यही देता हूं कि साइकिल और मै हो गए ना दो... लंबे लंबे सफर किए है इस साइकिल से, हजारों km के रास्ते नाप डाले। दोस्त ने पूछा कि सिलावट जी क्या आपको ये सारे रास्ते याद है तो मजाकिया लहजे में ही सही, पर मैने उन्हें बताया कि मेरे घर से 20 km रेडियस का एक सर्कल बना लो तो वो सभी रास्ते मैंने नापे हुए है, रास्ते कम पड़ गए पर हौसले नहीं... और इस बात में कही ना कही सच्चाई भी छिपी थी। जब निकलता हूं साइकिल पर अकेले तो बहुत सारे ख्याल आते है सोचता हूं कि उनको कलमबद्ध करूं, कुछ दिन पहले बारिश में 10 km दौड़ा सोसाइटी नंगे पैर,
बहुत सारे विचार थे फिटनेस को लेकर, सोचता रहा और बस सोचता ही रह गया, विचार परिस्थिति विशेष में आते है तो उन्हें सहेज लेना चाहिए, नहीं तो उस तरह से इस उमंग से शायद ही आ पाए। खैर अब बारिश आएगी तो दौडूंगा और इस पर लिखूंगा भी।
मै बात कर रहा था कि अपने आप से बात करने की तो बस यही सोचता रहता हूं कि क्या बेस्ट से बेस्ट किया जाए कि डाक्टर के कहने का इंतजार कर रहे है उन्हें अपने साथ ले चलूँ इस राह पर। बचपन में पढ़ा था कि आम का स्वाद गूंगा नहीं बता सकता जो खाता है वहीं जानता है। जीवन में ज्यादा नहीं दौड़ा था और सफर शुरू हुआ 2019 से, अतीत के पन्नो को पलटता हूं तो ऐसा लगता है बहुत समय बीत गया पर इस बीच सैकड़ों रनर्स और राइडर्स के साथ जुड़ा, साथियों के साथ फिटनेस फ्रीक ग्रुप को एक फिटनेस मिशन की तरह आगे बढ़ाया मिलकर, बहुत नए साथी जोड़े जो आज बड़ी बड़ी इवेंट में मेडल जीतकर ला रहे है, अच्छा लगता है। मुझे तो सच में कई बार ऐसा लगता है कि जिसकी फिटनेस की गाड़ी चल पड़ी उस पर ज्यादा ध्यान क्या देना, रुकेगा तो अब ये है नहीं, जब जीवन के 60 बसंत देख रहा होगा और बिल्कुल फिट दिखाई देगा तो शायद इससे बढ़िया गिफ्ट आप किसी को क्या दे सकते है। सबसे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है उन पर जो सोचते तो है पर कर नहीं पाते, उनके लिए समय समय पर फिटनेस इवेंट जैसे 21 दिन का , 51 दिन का, 100 दिन का चैलेंज चलाते रहते है, ट्राफी मेडल्स क्लोजिंग सेलिब्रेशन सब। कुल मिलाकर रुकना नहीं है। वो गाना अक्सर सुनता रहता हूं कि इक रास्ता है जिंदगी, ये कदम किसी मुकाम पर जो थम गए तो कुछ नहीं..... सच ही तो है। मोटिवेशन सॉन्ग अच्छे लगते है। स्टेटस कोशिश करता हूं कि फिटनेस का ही लगे। बहुत दूर दूर के साथियों को जोड़ा है, हो सकता है शायद हम इसी तरह किसी की मदद कर पाए। मेरे मुम्बई के रेलवे में एक बहुत बड़े अधिकारी है अक्सर बोलते है लिखा करो ब्लॉग खुद पिछले 20 साल से ब्लॉग पर सक्रिय है, बड़ी बारीकी से लिखते है, लागलपेट नहीं होती बातों में , अच्छा लगता है पढ़कर, पर मै रोज रोज लिख नहीं पाता, पर लगता है जो विचार आए लिख तो देना ही चाहिए।
साइकिल पर दोबारा आता हूं, सच बोलूं तो भीड़भाड़ वाली सड़कों पर साइकिल चलाने में कोई आनंद नहीं है, ट्रक, बस के कानफोडू हॉर्न से राइडिंग का मजा किरकिरा हो जाता है। वैसे भी साइकिल का हैंडल सोसाइटी से निकलते ही गांव की और अपने आप ही रुख कर लेता है , शायद वो भी मेरा मन जानती है। अच्छा एक बात है, साइकिल कही भी चले, आप देखना हमेशा हेलमेट मिलेगा, नो हेलमेट नो राइड के रूल का पूरा पालन होता है , वैसे भी सुरक्षा से कोई समझौता करना ही क्यों है।
जब दोनों तरह खेत ही खेत और उस मिट्टी से आती सौंधी सौंधी हवा, उस राइड का मुकाबला कुछ नहीं ,कुछ भी नहीं..... नीलगाय मिली कई, इतनी पास थी मुश्किल से 20 मीटर, हिली नहीं बहुत देर से उनसे बातें की, उनके फोटो सेशन किए जैसे कह रही हो कि रोज आया करो हमे भी अच्छा लगा।
मुसीबत भी आज कई थी, एक तो Strava में पता नहीं किया ग्लिच आ गया साथी का km हो गया 16 और मेरा पता नहीं कैसे 8 km ही रहा , खैर घर आते आते 15 हो ही गया, जोकि आज करना ही था, वास्तव में हुआ तो 25 के आसपास ही होगा और वो कम हवा की साइकिल को 6 km तक चलाना भी था तो थोड़ा मुश्किल, फिर भी ये भी तो चैलेंज का ही तो हिस्सा है। देखा जाए तो जिंदगी भी तो ऐसे ही है, सभी दिन तो साइकिल में हवा नहीं भरी होगी, सभी दिन तो स्मूथ सड़क नहीं मिलेगी, उतार चढ़ाव जीवन का हिस्सा है।
आज लगभग 7 ट्यूबवेल चलती देखी, हम जैसे दिल्ली NCR में बसे लोगों के लिए तो ये किसी सपने से कम नहीं कि ऐसी सराउंडिग मिल जाए....
पता नहीं क्या क्या लिख दिया पर जो सोचता गया वो लिखता गया, कल कुछ साथियों के साथ इसको रिपीट करना है, फोटो देखकर शायद जाने का मन वो पहले हो बना चुके थे........
You are a great person with pure soul and heart a motivator for many like me... I will always be thankful to you..
ReplyDeleteRegards..
अमित जी, आप के दिल की तहों से निकली और उतने ही सुंदर शब्दों में पिरोयी पोस्ट इतने लंबे अरसे के बाद पढ़ने को मिली।..बहुत ही खुशी हुई और बहुत ही अच्छा लगा।..इतनी सुंदर तस्वीरें...जो आपने लिखा कि हम लोग जैसे ही अपने शहरी घरों से निकल कर गांवों की तरफ़ मुंह करते हैं तो इतने इतने सुंदर नज़ारें हैं कि इन को ब्यां ही नहीं किया जा सकता। मैं भी इस बात से पूरी तरह सहमत हूं। और हां, कल भी अगर आप इसी रास्ते से जाएंगे तो पूरे का पूरा नज़ारा बदला हुआ मिलेगा....हर पल बदल रही है रूप जिंदगी....। हरियाली अलग अंदाज़ में होगी, आकाश की छटाएं अलग होंगी और पानी भी कल अलग होगा, रास्ते में मिलने वाले लोग भी अलग होंगे ...और साईकिल की हवा फुल होने से अलग तजुर्बा होगा ...आज कम हवा वाला एक्सपिरिएंस भी ज़रूरी था...वरना आप की कलम से वे यथार्थ पूर्ण और सुंदर बातें कैसे निकलतीं कि ज़िंदगी भी तो ऐसी है ..कभी हवा कम कभी ज़्यादा....और हां, वह बात बहुत बढ़िया है कि जिस बात का ख्याल आए लिख लेना चाहिए ....कईं बात फौरन नहीं भी लिखा जाता तो एक डायरी में वे आइडिया नोट कर लेने चाहिए ....ये बहुत काम आते हैं, बाद में कभी ...क्योंकि वैसे तो आईडिया आवारा परिदों की परवाज़ की तरह हैं ..कब कहां उड़ जाएं पता ही नहीं चलता। और ऐसे ही फिटनैस का संदेश देते रहिए....एक किताब लिखिए....आप लिखने में पूर्णतया सक्षम हैं। एक बात और ..मैं कल परसों ही आप की एक पोस्ट को याद कर रहा था ..अरूणिमा सिंह के एवरेस्ट तक पहुंचने वाली ...और अभी फिर से आप के ब्लाग पर दिख गई ।..बहुत बढि़या लिखा आपने ....मज़ा आ गया ....एक डॉयरी लिखने जैसा है यह ब्लॉग भी....आप का कंटैंट इतना बढ़िया है कि बहुत से लोग प्रेरित होंगे ..
ReplyDeleteहां, अमित जी , कल की सैर और सैर पर लिखी अगली पोस्ट का इंतज़ार रहेगा....तस्वीरों के साथ, ऐसे ही नहीं कहते कि एक तस्वीर एक हज़ार शब्दों के बराबर होती है ....आप की पोस्ट की उस तस्वीर की असलियत पर तो यकीं ही नहीं होता जिस में हरे भरे खेत हैं और दूर गगनचुंबी इमारतें ...आदमी सोच में पड़ जाता है कि हमारे आस पास मां प्रकृति ने हमें कितने बेशकीमती नैसर्गिक तोहफ़ों से नवाज़ा हुआ है ...बस, हमारे आलस त्यागने भर की देर है ...
ReplyDeleteबहुत बढ़िया लिखा 👏
ReplyDeleteआज Strava का ग्लिच होने के बावजूद आपने लक्ष्य पूरा किया, लगभग 25 KM और कम हवा वाली साइकिल के साथ 6 KM, ये अपने आप में बड़ी उपलब्धि है।
आपकी बात सही है, जीवन भी साइकिल की तरह है। कभी स्मूथ रोड, कभी उतार-चढ़ाव। उसी में असली चैलेंज और मज़ा है।
ट्यूबवेल और बच्चों की खुशी वाला नज़ारा दिल्ली NCR की भागदौड़ के बीच सुकून देता है।
कल टीम के साथ दोबारा के लिए शुभकामनाएं। अगला ट्यूबवेल भी यादगार होगा।