रूम हीटर और ब्लोअर

रूम हीटर  और ब्लोअर 

दोस्तों, आज मैं  आपके साथ अपने जीवन का एक ऐसा अनोखा किस्सा सांझा  कर रहा हूँ  जिसमे हास्य के साथ एक गहरी शिक्षा भी छिपी है कि  सच्ची दोस्ती मे  छोटी-छोटी बातो का पर्दा होने से दुनिआ किस तरह फायदा उठाती  है। वाक्या  जुड़ा है मेरे खास  दोस्त से ,  जिससे हमारे  पारिवारिक सम्बन्ध थे।  सरकारी कॉलोनी मे  मेरे और उसके घर मे  बस 50 कदम का फैसला था।  5 साल पहले  की बात है , जनवरी के महीने का हड्डिया जमाने वाला ठण्ड का दौर चल रहा था।  ठण्ड से बचने के किये जा रहे सारे इंतजाम नाकाफी लग रहे थे। 

पहला सीन 

मैं  सपरिवार दोस्त के घर जाता हूँ। ठण्ड  से बचने  के लिए दोस्त ने  एक ब्लोअर खरीदा  था।  दोस्त  ने बताया कि  ये ब्लोअर कल ही तो लेकर आया हूँ।  बहुत ही बढ़िया क़्वालिटी  का है।  रिजल्ट बहुत अच्छा है , पूरा कमरा फटाफट गरम हो जाता है।  भाई ने  उसकी शान  मे  बहुत कशीदे  गढ़े  थे  । हम भी बोल उठे वाह!  भाई वाह!  मान गए आपकी पारखी नजर को




हमने बताया  भाईसाहब! वैसे हम भी कल ही तो एक रूम हीटर लाये है,  गजब परफॉरमेंस है उसकी।  जितनी तारीफ की जाये कम।  उसके बाद ब्लोअर की  गरमागरम हवाओं  मे  गरमागरम  चाय  का दौर चला।  फिर ढेर सारी  बाते  करने के बाद  दोस्त को  अगले दिन अपने  घर आने का न्यौता  देकर हम अपने घर आ गये।



दूसरा सीन 

अगले दिन वही दोस्त सपरिवार हमारे घर आया ।  हमे ऐसा लगा कि कही ना  कहीं  दोस्त के मन मे  हमारे रूम हीटर को देखने की  इच्छा  थी। पूरी शानोशौकत से हमने भी अपने  रूम हीटर की तारीफ के पुल  बांध  दिये। पक्ष-विपक्ष मे  बहुत बाते हुई और आखिर मे फैसला आया कि  देखो भाई,  दोनों बढ़िया है अपनी-अपनी जगह, आपका ब्लोअर अपनी जगह ठीक और हमारा हीटर अपनी जगह ठीक।  बातो का सिलसिला चाय पीकर ही खत्म हुआ।

तीसरा सीन 

उनके जाने के बाद श्रीमती बोली - सुनो जी कुछ भी हो , वो ब्लोअर इस हीटर से बढ़िया है अगर हो सके तो  रूम हीटर को बदलकर ब्लोअर ही ले आओ भाईसाहब जैसा। कही न कही हमे श्रीमती की बात मे  वजन लगा  क्योंकि उस भयंकर ठण्ड मे  वो हीटर हमे भी कामयाब नहीं लग रहा था फिर क्या था, अगले ही दिन शाम को हम जा पहुंचे उसी इलेक्ट्रिकल वाले की दूकान पर।



हमने हीटर के बदले ब्लोअर लेने की बात की तो वो बोला  ब्लोअर तो  अभी  नहीं  है , हमने पैसे वापिस लेने की एक नाकाम कोशिश भी की, पर उस कर तो वह कब्ज़ा कर चुका  था फिर भी  हमारे अनुरोध पर वह बोला  एक काम करो, एक घंटे बाद आना,  बिक गया तो पैसे ले जाना ।  जब दोबारा गए तो दुकानदार बोला-  बिक तो गया है लेकिन मेरे  पास एक  ब्लोअर है अगर पसंद हो तो 200 रूपए और दो और ले जाओ।  बिल्कुल  वैसा ही ब्लोअर था वो जिसकी मुझे तलाश थी।  ख़ुशी-खुशी और पैसे देकर आखिर हम ब्लोअर घर ले ही आये।

चौथा सीन 

अगले दिन दोस्त के यहाँ फिर सपरिवार जाना हुआ। विशेष तो यही था कि  जरा भाईसाहब को बताया जाये कि  हम भी ब्लोअर वाले हो गये  है अब । पर ये क्या ! जाते ही देखा तो हम चकित रह गये, ब्लोअर गायब था।  पूछने पर दोस्त ने बताया कि  यार  मैने सोचा  कि  ब्लोअर से अच्छा  तुम्हारा हीटर ही है , इसीलिए मै  कल शाम इसे बदलकर कुछ और पैसे देकर तुम्हारे जैसा रूम हीटर ले आया।

उसकी ये बात सुनकर मन ही मन हसीं तो बहुत आ रही थी हमे  कि  तभी अचानक हमारी नजर उनके रूम हीटर पर पड़ी।  उसकी सफ़ेद रंग की बॉडी  पर ऊपर एक काला  डॉट  लगा था।  बिल्कुल  ऐसा ही डॉट तो था हमारे हीटर के ऊपर भी । मन मे  शक हुआ तो पूछा  कि  कहाँ से लिया ये।  पूछने  पर पता चला कि  वो तो उसी इलेक्ट्रिकल वाले  की दुकान थी जिससे हमारा पाला  पड़ा था।

हमे समझते देर नहीं लगी कि  वो हमारा ही रूम हीटर उस दूकानदार ने दोस्त को चिपका  दिया था और दोस्त ने भी  हमारे  घर पर लाया अपना ब्लोअर पहचान लिया।  मतलब अब बिल्कुल  साफ़ हो चुका  था।  हम दोनों ने अपने ब्लोअर और हीटर की  आपस मे  ही अदला-बदली की वो भी बिना बताये और दूकानदार ने इसके बदले हम  दोनों से एक्स्ट्रा  पैसे भी हड़प लिए। हम सब लोग उस समय इस घटना पर बहुत हॅसे और अपनी बेवकूफी पर भी।

अंत मे 

वास्तव मे  अगर हम अपने मन की बात शेयर कर लेते तो ये दिन न देखना पड़ता। हम आपस मे  भी तो हीटर और ब्लोअर की अदला-बदली कर ही सकते थे।  आज भी जब इस घटना की याद आती है तो ब्लोअर और रूम हीटर वाला यह वाक्या  तरोताजा हो जाता है और अतीत के पलो  की एक मुस्कान फिर से जिन्दा हो जाती है। ये वाक्या सीख दे गया कि सच्चे  दोस्तों मे बाते शेयर न हो तो कैसे दुनिआ फायदा उठाती  है।

दोस्ती पर लिखी ये खूबसूरत लाइन भी याद आ रही है -

क्या खूब था वो बचपन
 जब
2 उंगलिया जोड़ने से दोस्ती हो जाती थी





अमित सिलावट 





Comments

  1. ReallyVery interesting and comedy story. Salawat ji I am proud of u. You r generous like a diamond.

    ReplyDelete
  2. Very nice sirji. Nice presentation too. This kind of things do happen in our life to give us some kind of learning. It's like दिल मांगे मोर. 😁

    ReplyDelete
  3. bahut badiya laga yeh sansmrn- seekh bhi de gaya - very nicely written, really!

    ReplyDelete
  4. Jitne paise aap dono ne milakar dukandar ko diye, utne mai to old monk ka full aa jata.

    ReplyDelete

Post a Comment

Popular posts from this blog

मेरी पहली मैराथन दौड़

अरुणिमा सिन्हा - साहस का दूसरा नाम