मेरी पहली मैराथन दौड़

मेरी पहली मैराथन  दौड़ 


दो शब्द -
जिन्दगी  की किताब मे  मैराथन का एक पन्ना अब  जुड़  चुका  था। मैं  कोई ऐथलीट तो नहीं था, पर  10 किलोमीटर से शुरू  होने वाला ये सफर मैराथन तक कैसे जा पहुँचा, पता नहीं । चार महीने लगे थे इस मिशन को।  इस रोचक कहानी के माध्यम से आप लोगो के साथ दिल की बात शेयर करूँगा । मैराथन की तैयारी के  हर पड़ाव पर रोशनी  डालने का एक छोटा सा प्रयास  है यह कहानी  ।  मुझसे पहले ना  जाने कितने लोग मैराथन दौड़ चुके है और आने वाले समय मे  भी दौड़ते रहेंगे।  पर मेरे  लिए यह मैराथन दौड़ विशेष मायने रखती है।  नई  सोच, नई  ऊर्जा का संचार हुआ है जीवन  मे।  जब आप इसे पढेंगे  तो यकीन मानिये  पूरा पढ़कर रहेंगे ऐसा मेरा मानना  है। 


समर्पित -
अपनी यह कहानी मैं  उन  गरीब मजदूरों  और उनके नन्हे प्यारे बच्चों  को समर्पित करता हूँ  जो कोविड  लॉक डाउन के इस मुश्किल समय मे  अपने घर जाने के लिए  हजारों  किलोमीटर की पैदल यात्रा करने को मजबूर है आखिर इससे बड़ी मैराथन क्या होगी ......... कहीं  ना  कहीं  आज मैं उनकी यात्रा का दर्द महसूस कर सकता हूँ  जो मैने इस मैराथन में महसूस किया था ..............


चलिये  फिर ,आपको ले चलते है इस रोचक और सन्देश देने वाली कहानी की दुनिआ मे -

याद आ रहा है कि  बचपन मे  पांचवी कक्षा मे  एक चैपटर मे  मैराथन के बारे मे  कुछ पढ़ा था। ऐसा कहाँ सोचा था मैंने कि 30 साल के बाद मैराथन दौड़  पूरी करके  अपने विचार सांझा  करूँगा। पर ये सच है कि  मै अगर मैराथन पर ना  लिखुँ  तो कलम से अन्याय होगा। पूरी ईमानदारी से दिल की बात आप तक पहुंचाने  की पूरी कोशिश  करूँगा। 

तो चलिये बात शुरू  करता हूँ  बचपन से , मैं  कभी एथलीट नहीं रहा।  खेलो मे  हमारे प्रमुख खेल कंचे , पतंगबाजी , गुल्ली डंडा , माचिश डिब्बे  वाले ताश  आदि हुआ करते थे।  इन  खेलो मे  घर से डांट- पिटाई खाने के बाद भी नए कीर्तिमान स्थापित  किये थे हमने।  सबसे बुरा तो क्रिकेट लगता था।  एक घंटे फील्डिंग करने के बाद आयी अपनी बैटिंग मे  हम बस एक मिनट भी टिक जाये तो बहुत बड़ी बात हुआ करती थी।



समय बीतता गया और 2002 मे  रेलवे की  नौकरी लगने के बाद समय मानो  पंख  लगाकर उड़ने लगा। 2018  मे  ट्रांसफर लेकर हरियाणा से  दिल्ली आ गया।  पता नहीं क्यों, जब भी टीवी पर ऐसी न्यूज़ आती थी कि  आज मैराथन मे   दिल्ली दौड़ी....... बम्बई दौड़ी .......इतने लोगो ने हिस्सा लिया। उनकी छाती पर लगे कागज के वो नंबर स्टीकर तथा एक ही कलर की टी-शर्ट मे सैकड़ो लोगो का दौड़ना मुझे  आकर्षित करता था। सोचता था कि कभी मौका लगा तो मैं  भी दौडूंगा। मैं  इस बात मे  विश्वाश रखता हूँ  कि -अपने रास्ते  खुद चुनिये क्योंकि  आपको आपसे बेहतर और कोई नहीं जानता। 

दिल्ली आने  के बाद उस नन्ही चिंगारी को तो मानो  हवा मिल गयी हो। मेरे छोटे से सपने को पंख लगने वाले थे।  मेरे रेलवे अधिकारी भी हॉफ  मैराथन मे  दौड़ा  करते थे। उनकी मैराथन दौड़ की व्हाट्स ऍप  डीपी भी मुझे बहुत अच्छी  लगती थी। चेहरे पर सदा मुस्कान ही देखी  है उनके। हमेशा  ऊर्जावान रहने के पीछे उनकी फिटनेस का बड़ा योगदान था। 

मेरी पहली 10 किलोमीटर दौड़  (23 अक्टूबर 2019 )-

आखिर वो दिन आया जब एयरटेल द्वारा आयोजित हाफ मैराथन प्रतियोगिता मे हमने अपना और श्रीमती का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 10 किलोमीटर  दौड़  के लिए करवा ही लिया। मैं  उस समय अपने बढ़ रहे वजन को कंट्रोल  के लिए रोहिणी के डिस्ट्रिक्ट पार्क मे  लगभग आधा घंटा दौड़ा करता था।  मुझे विश्वाश था कि  मै  यह रेस तो आराम से कर लूँगा। कुछ ही दिनों के बाद वो घड़ी  भी आ गयी जिसका इस दिल को बेसब्री से इन्तजार था।

दौड़ से पहले का सुबह 4 बजे  का दृश्य 


सुबह 4 बजे  जंतर-मंतर से शुरु  हुई यह दौड़ इंडिया गेट के रास्ते होते हुए जवाहर लाल स्टेडियम  तक समाप्त होनी थी। जहां  एक ओर फिजाओ मे गुलाबी ठण्ड  थी और दूसरी ओर  हमारा जोश चरम पर था। एयरटेल ने बड़ा ही सुंदर आयोजन किया था। रास्ते मे सभी सुविधाएं जैसे ट्रैफिक कंट्रोल ,पानी , एनेर्जी  ड्रिंक , ढ़ोल-नगाड़े , भांगड़ा  करते कलाकार , म्यूजिक , वाशरूम आदि सब का बेहतरीन प्रबंध था।

पंजाब के भंगड़ा ने तो वाकई फिजाओ मे जोश भर दिया था 

जब सब लोग साथ दौड़ रहे थे तो मुझे बस एक ही एहसास हो रहा था कि  मेरा भारत दौड़  रहा है।  धर्म   मजहब जात-पात से दूर भारतीय ही तो थे सब।  उन भारतीयों के साथ  कुछ विदेशी मेहमान भी दौड़े थे। जैसे ही राजपथ पर पहुँचे  तो सामने  रोशनी  से जगमग इंडिया गेट दिखाई दे  रहा था।  जैसे-जैसे उसके पास जा रहे थे, देशभक्ति का पारा भी चढ़ता जा रहा था।



राजपथ पर दौड़ते हुए 
                          


 जैसे ही इंडिया गेट का चक्कर लगाने लगे तो सभी ने  उस समय भारत माता की जय , वन्दे  मातरम के नारो  से  आकाश को गूंजा दिया था।  क्या अद्भुत नजारा था वो सच मे ।  इंडिया गेट ना  जाने कितनी बार गया, पर सच कहूँ  तो ऐसी रोंगटे खड़े करने वाली फीलिंग पहले कभी नहीं आई। भारतमाता के लिए अपनी जान  की बाजी  लगाने वाले वीरो के प्रतीक इस इंडिया गेट पर लगाया गया यह चक्कर मेरे मन पर  एक अमिट  छाप  छोड़ गया। 


बड़ा ही सुन्दर  नजारा था यह - भारत माता की जय के नारे फिजाओ मे  गूँज  रहे थे 


बड़े ही आराम से हमने यह दौड़ 1 घंटा 10 मिनट मे  पूरी की और हमारी श्रीमती ने 1 घंटा 20 मिनट मे। उसके बाद मैंने  अपनी सभी दौड़ों को अकेले ही अंजाम दिया। अपनी इस पहली दौड़ मे हम बहुत खुश हुए। वो खुशी  जिसका मैने  कभी ख्वाब संजोया था वो आज पूरा हो चुका  था।  पर एक कमी इसमे रह गयी थी, वो कमी थी ड्रेस कोड वाली टी शर्ट की।  पता नहीं क्यों, एयरटेल ने 10  किलोमीटर की दौड़ वालो को टी शर्ट नहीं दी थी जबकि हॉफ  मैराथन  मे  सभी को प्रिंटेड  एयरटेल हॉफ  मैराथन  वाली टी शर्ट मिली थी।  इस कसक से उसी समय हॉफ  मैराथन (जोकि 21 किलोमीटर की होती है ) दौड़ने की इच्छा जाग उठी थी।  उस टी शर्ट ने आग मे  घी का काम करके हमारी हॉफ  मैराथन की भूख  पैदा कर दी थी। जीत की इस खुशी  मे  हम नई  दौड़ का संकल्प साथ ले आये थे।

कहीं  पढ़े हुए ये शब्द भी दिमाग मे  गूँजते  थे -
जीवन की सबसे बड़ी खुशी  उस काम को करने से होती है , जिसे लोग कहते है तुम नहीं कर सकते .....


मेरी पहली हॉफ  मैराथन -21 किलोमीटर (14 दिसंबर 2019 )- 

अगर वास्तव देखा  जाए  तो मैराथन भी तो एवरेस्ट  पर चढ़ने के बराबर ही तो है , फर्क बस इतना ही तो है मैराथन मे  एवरेस्ट  पड़ा है। 10 किलोमीटर की दौड़ करने के बाद आत्मविश्वाश तो बढ़ा ही था, साथ ही अब न जाने 10  किलोमीटर कुछ कम  सा लगने लगा था क्योकि दिमाग तो हॉफ  मैराथन के लिए मानसिक  रूप से तैयार था, बस शरीर को समझने की देर थी। दिमाग जीता और हम  दिन प्रतिदिन रोहिणी के डिस्ट्रिक्ट पार्क मे  पसीना बहाने लगे। मोबाइल के एक ऐप  मे  दूरी भरने के बाद हम दौड़ते थे और हर किलोमीटर पर वह हमारी स्पीड और टाइम बताता था।  हाफ मैराथन दौड़ने से पहले हमने 15 किलोमीटर की एक ट्रायल दौड़ इसी ऐप  से पूरी कर ली थी। विश्वाश था क़ि  दौड़ लेंगे।

रोहिणी पार्क का मुख्य  द्वार 

मैराथन आयोजनों पर अब पैनी नजरे टिकाई  जाने लगी और फिर दिल्ली मे  ही वन  इंडिया मैराथन के बैनर तले हमने  यह रेस भी  2 घंटे 25  मिनट मे  पूरी कर ली।  यह रेस जवाहर लाल नेहरू  स्टेडियम से शुरू होकर वही खत्म हुई। मलाल इस बात का रहेगा कि  इस दौड़ के रुट मे  इंडिया गेट नहीं आया।  हमारा हौसला उस समय मानो सातवें  आसमां  पर था।  पर उस समय पूरी मैराथन (42 किलोमीटर ) का ख्याल नहीं आया था क्योकि हॉफ  मैराथन करने के बाद तो दिल बस ये ही कह रहा था कि  यार ये कहाँ  पंगा  ले लिया। दौड़ के बाद कुछ दिन शरीर मे  दर्द रहा जो दो तीन दिनों मे अपने आप ठीक हो गया।

आखिर हॉफ  मैराथन पर विजय हासिल की 

मिशन मैराथन - 42  किलोमीटर (9 फरवरी 2020 )-

जब शरीर पूरी तरह फिट हो गया तो फिर दिमाग मे  पता नहीं  कैसे मैराथन का कीड़ा घुस गया।  दिमाग ने शरीर को कुछ इस तरह समझाया कि  देख भाई अब बस मैराथन ही तो बची है, थोड़ी सी हिम्मत दिखा, अभ्यास कर और बन जा 40 साल की उम्र मे  मैराथन मैन। और वैसे भी उम्र और शौक मे  भला क्या नाता। अजीब-अजीब मोटिवेशन लाइन पढाई गयी शरीर को तैयार करने मे - मंजिल उनको मिलती  है जिनके सपनो मे  जान होती है , पंखो से कुछ नहीं होता हौसलों  से उड़ान होती है।

वैसे आप लोगो को बता दूँ  कि  हॉफ  मैराथन और फुल मैराथन की ट्रेनिंग अलग होती है।  ऐसा तो बिल्कुल  नहीं है कि  हॉफ  मैराथन का दुगना  ही तो भागना है। जब धरातल पर दौड़ते है तो  वास्तविकता तभी पता चलती है। पर लगातार अभ्यास से और सही योजना से कुछ  भी संभव हो जाता है।

खैर धीरे- धीरे ही सही, दिमाग ने आखिर शरीर को मना ही लिया। उसके बाद मैराथन की तैयारी की योजना मे  लग गए।  यू -टयुब  पर फैले ज्ञान को समेटकर उसे निचोड़ा और मैराथन तैयारी की ठोस योजना बना डाली।  कितना भागना है,कैसे भागना है, क्या खाना है वगैरह वगैरह। पर  वो कहते है ना , गुरु बिना ज्ञान नहीं गोपाला  तो फिर खोज हुई गुरु की , जो जाकर रुकी मेरे  जयपुर वाले घनिष्ठ मित्र के घनिष्ट मित्र पर। ये दोनों भी रेलवे विभाग मे अपनी  सेवाएं  दे रहे है।  मेरा दोस्त उसके बारे मे अक्सर कहा  करता था कि  वह इतना दौड़ चुका  है जैसे पूरी धरती  के दो -तीन चक्कर लगा लिए जाये। इस बात  मे वास्तविकता भी थी।  

रोहिणी का वो पार्क जहाँ मै  दौड़ा करता था 

वो मेरे मैराथन गुरु जी ना  जाने कितनी फुल मैराथन, हाफ मैराथन कर चुके थे।  शायद  ही भारत का कोई शहर  बचा हो कि  वो वहां दौड़े ना  हो।  दौड़ने के गजब शौकीन है वो।  बरसाते , ख़राब  मौसम  भी उनकी दिनचर्या को हिला नहीं पाते थे और तो और लॉक-डाउन मे  भी गुरु जी ने घर मे  ही दौड़-दौड़ कर मैराथन पूरी कर डाली।  अब जब ऐसा ज्ञानी  गुरु मिल जाये तो फिर कही और क्यों  जाना (भारतीय जीवन बीमा निगम के विज्ञापन की तर्ज पर ) . हमारी बल्ले-बल्ले होना तो तय हो ही चुका था। 

गुरु जी से मैराथन की बारीकियो के टिप्स लिए गये।  उन्होने बहुत जानकारियाँ  दी जैसे- क्या करे ,क्या ना  करे।  खाने-पीने और दौड़ने की गहन जानकारी दी।  उनके बताये रास्ते पर चलते हुए हमने मिशन मैराथन को अमली जामा  पहनाना  शुरू कर दिया। पागलपन का दौर भी चला था उस समय ।  जिसमे  मेट्रो से तीन स्टेशन पहले उतरकर 4  किलोमीटर पैदल घर  आना भी शामिल था।  पैदल चलने के बहाने खोजे जाने लगे।  3-4 किलोमीटर की दूरी ऑटो से करना तो मानो  हमारी शान के खिलाफ  बात होती थी।  अपनी 11 नम्बर  की बस पर बहुत भरोसा हो गया था हमे । मिशन मैराथन की तैयारिओं  का दौर यूं  ही चलता रहा। 

यू -ट्यूब के ज्ञान से हमे यह पता चल चुका  था कि  जिस तरह परीक्षा आने पर विद्यार्थी ज्यादा पढ़ने लगता है बस इसका उल्टा मैराथन मे  करना है।  मतलब साफ़ था कि  मैराथन से 3 -4  दिन पहले शरीर को पूरा आराम देना है। हमे ये भी पता चल चुका  था कि  लगभग 20 किलोमीटर तक आते-आते शरीर मे  ग्लूकोस की मात्रा बहुत कम रह जाती है। गुरु जी मुझे बता चुके  थे कि  एक बार कम  से कम  35 किलोमीटर का ट्रायल रन जरूर  कर लेना। नजदीक आती मैराथन को देख 35 किलोमीटर मिशन को अंजाम  देने की योजना बनाकर उसे धरातल पर उतार  दिया।  बड़ा ही रोचक किस्सा है इस 35 किलोमीटर दौड़ का जो मैराथन से चार दिन पहले दौड़ी गयी।

मोबाइल फ़ोन के रनिंग ऐप  का स्क्रीन शॉट 



मुश्किलों  भरा 35 किलोमीटर ट्रायल रन ( वो कभी ना  भूल सकने वाला वाक्या ) - 

पूरी तैयारी के साथ हम अगले दिन सुबह 5 बजे पार्क मे  जा पहुँचे।  रनिंग से पहले की कसरतें  करके हमने एप  मे  35 किलोमीटर भरकर भागना शुरू कर दिया। साथ मे  एलेक्ट्रोल के घोल वाले  पानी की बोतल और जेब मे  कुछ चॉकलेट रख ली थी।  दौड़ने से एक घंटा पहले दो केले और ब्राउन ब्रेड पी-नट  बटर के साथ पहले ही खा चुका  था।  सिपाही तैयार था लड़ने के लिए।  पर उसे क्या पता था कि  मुसीबतों  का दौर भी आने वाला हैं। 

बस 10 किलोमीटर ही तो भागा  था कि  ये क्या हल्की -हल्की  बरसात  शुरू हो गई जो धीरे- धीरे इतनी तेज हो गई  कि  लगभग सभी लोग शेड और पेड़ों  की ओट  मे  खड़े हो गये।  कदम तो नहीं रुके मेरे , पर उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा था और समय भी कहाँ बचा था बाद मे अभ्यास करने का।  भीगते-भीगते दौड़ने के अलावा  कोई चारा नहीं था।  लगभग 10 मिनट तक उस ठण्ड मे  बारिश मे  दौड़ते रहने से मन मे  ये विचार भी आ रहे थे क़ि  अगर कुछ सर्दी जुकाम हो गया तो बेटा  फिर कर लिए मैराथन।  खैर बारिश रूक गयी और हमे अपने ना रूकने के निर्णय पर गर्व हुआ।

सूरज नहीं निकला था अभी।  दौड़ते रहे, दौड़ते रहे लगातार...... बिना रुके, बिना थके....... बस दौड़ते ही रहे।  जब मोबाइल ऍप  ने बताया की 21 किलोमीटर पूरे हो चुके है तो मुझे हाफ मैराथन की याद आ गयी।  सोचने लगा बस अब यही से तो शुरू  होती है असली परीक्षा।  आज शरीर की टेस्टिंग जो हो रही थी।  बीच-बीच मे  इलेक्ट्रोल  के घोल वाले  पानी की बोतल  दौड़ते-दौड़ते ही पीता  रहा और चॉकलेट भी खाता  रहा।  वाकई शरीर की दौड़ने की शक्ति  धीरे-धीरे कम  होती जा रही थी।

इसी शेड मे  बारिश से बचने के लिए सैकड़ो लोग खड़े हो गए थे 

पता नहीं क्या जिद थी भगवान की उस दिन , एक बार फिर बारिश का दौर आया और हल्की- हल्की  बूँदे  जल्दी ही मूसलाधार बारिश मे  बदल गई।  इतनी तेज बारिश मे तो कोई शेड मे  भी ना  रूक पाये।  सभी लोग बारिश से  बचकर शेडो मे खड़े हो गये। उस समय मै  25 किलोमीटर तक भाग चुका  था और मंजिल अभी दूर थी।  अब क्या करुँ  यही सोचते-सोचते उस तेज  बारिश  मे सिर  से पैर  तक बुरी  तरह भीगकर भी  दौड़ता रहा जो पहली बारिश से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर थी ।  एक बार को तो ऐसा लगा कि  लगता है मेरी परीक्षा ली जा रही है।  मरता क्या ना  करता , मैं  उस  समय केवल अकेला ही दौड़ता रहा........  बस दौड़ता रहा........... दिमाग मे  चल रहे विचारों  के तूफ़ान के साथ। 

इंटरनेट से लिया एक चित्र 

वहीं  शेड मे  खड़े कुछ लोगों  की हल्की -हल्की आवाज मेरे कानों मे  पड़ी।  मुझे सुना कि  कोई बोल रहा था देखो पागल दौड़ रहा हैं.... ...... सही ही तो था वो , एक पागलपन ही तो सवार  था उस समय सिर  पर। अच्छी  तरह याद है मुझे , 15 मिनट तक अकेले ही दौड़ते रहने के बाद आखिर जब बारिश रुकी तो जैसे ही सूरज की किरण ने रेसिंग  ट्रैक  का माथा चूमा तो उस नजारे ने जो गजब की ताकत दी उनको शायद मैं शब्दो  का जामा  ना  पहना  सकूँ। दिल ने इसको बिल्कुल  ऐसे ही महसूस  किया जैसे मुसीबतो के दौर के बाद उम्मीदों  का सूरज उदय होता है।

 हां  एक बात और , उस समय मेरी आधा लीटर की पानी की बोतल और चॉकलेट खत्म  हो चुकी थी।  प्यास के मारे बहुत बुरा हाल  हो चला था।  मेरे दिमाग मे  कही पढ़ी  ये लाइन  चल रही थी -अगर आप बहुत बुरे वक्त से गुजर रहे है तो चलते रहिये , रूकिये मत , बुरा  वक्त गुजर जायेगा   इन पंक्तियों को लिखते-लिखते मेरा दिमाग मे  कोरोना के लिए भी ये ही विचार चल रहे है। अब मैं  बस मंजिल से एक किलोमीटर की दूरी पर था कि  तभी पापा जी का फ़ोन आया और मुझे बताया कि  मेरे छोटे मामा  अब नहीं रहे।  मन मे  विचार आया कि  लगता है सारे दुःख  भगवान  आज ही देगा। काफी समय से बीमार चल रहे थे वो।  अभी कुछ दिन पहले ही तो मिला था उनसे , उनकी सेहत वाकई बहुत ख़राब चल रही थी।  ये सोचते-सोचते मैने आखिर 35 किलोमीटर का ट्रायल मैंने  4 घंटे 13 मिनट मे पूरा कर लिया जो किसी भी मायने मे  मैराथन से कम  नहीं था।


लक्ष्य कोई भी बड़ा नहीं , जीता वही जो डरा  नहीं 
दौड़ पूरी करने के बाद सबसे पहले पानी पिया , उस समय जल  की कीमत मैं  बता नहीं सकता आपको। पार्क से  घर जाते ही मेरठ  के लिए रवाना हुआ और मामा जी  के दाह संस्कार मे  शामिल हो गया। ठीक चार दिन बाद मैराथन की दौड़ गुडगाँव मे  होनी थी।  दिल्ली वापिस आने के बाद रात मे  मैने अपने पूरे शरीर मे  तेज  दर्द महसूस  किया जो दिन के दर्द से कुछ ज्यादा ही था।  पैन  किलर लेने का विचार तो आया,  पर ली नहीं।  अजीब सा नशा था उस दर्द मे , उसे याद करता हूँ  तो ख़ुशी  भी होती है। खैर , अब तो वैसे भी आराम ही तो करना था तीन चार दिन तक।  

आखिर मैराथन की घडी भी आ गई -

दुनिया  अन्जान  थी , पर मैराथन तो हम दौड़ ही चुके थे अपने  दिमाग मे,अब तो बस धरातल पर दौड़ने की औपचारिकता ही बची थी। रविवार को सुबह 3 बजे  गुडगाँव मे AMITY GURGRAM MARATHON द्वारा बताई जगह   रिपोर्ट करनी थी और ठीक चार बजे  दौड़ शुरू होनी थी इसलिए शनिवार की रात मे  ही खास दोस्त के पास पहुँच गये।  दोस्त ने अपनी गाड़ी से ठीक तीन बजे मैराथन पॉइंट पर छोड़ दिया।

इसी बैनर के तले ही हमने  अपने मैराथन के सपने को पूरा किया

हिम्मत थी उसकी भी , ऐसा लग रहा था की वो भी मैराथन ही कर रहा है, पर दोस्त तो दोस्त होता है , बड़ी हिम्मत  दी थी  भाई  ने ।  उस रात मुश्किल से दो घंटे सो पाया था हालांकि वो गलत था मुझे शाम को 6 बजे सो जाना चाहिये था  और पूरी नींद लेनी थी मगर ऐसी परिस्तिथी नहीं थी। 

रेस की लाइन मे  लगे हुए 

दोस्त के साथ मैराथन ट्रैक पर 

21 किलोमीटर के दो लूपो मे  होने वाली यह मेरी मैराथन ठीक 4 बजे शुरू हुई और हमने किसी प्रोफेशनल धावक की तरह ही आगाज  किया।  शिद्दत से दौड़ना शुरू किया।  सबके साथ दौड़ने का मजा शायद  कुछ और ही होता है।  कुत्तों के झुंड भाग रहे लोगो को भौंक रहे थे , शायद  वो भी सोच रहे होंगे  क्या मुसीबत आ गयी सुबह-सुबह इन लोगो को , कहाँ भाग रहे है सब। रास्ते मे एयरटेल की तरह ही अच्छा  आयोजन था।  कोई  दिक्कत कोई परेशानी नहीं हुई।  पानी , एनेर्जी  ड्रिंक सब का पर्याप्त प्रबंध था। 21 किलोमीटर का पहला लूप हमने वही खत्म  किया जहाँ से दौड़ शुरू हुई थी

अब उस समय तक काफी दिन निकल चुका  था  मैने यह लूप 2 घंटे 15 मिनट मे  पूरा कर लिया। दूसरे लूप मे  जाते हुए रास्ते मे  मुझे एक दिव्यांग धावक दौड़ता हुआ मिला।  दिल तो किया क़ि खड़े होकर उसके जज्बे को सलाम करूँ।  मेरे मन मे  विचार आये कि  देखिये  इस दिव्यांग को जिसकी सोच अपंग  नहीं। कितनी शक्ति , कितनी कर्मठता  है इसमे। मन  की ताकत  से बड़ी कोई ताकत नहीं। भगवान ने हमे सही सलामत रखा है और समाज के कुछ  लोगों की  सोच  तो अभी भी अपंग ही  है। उस दिव्यांग की जीवटता ने मुझे दौड़ने की एक अलग ही शक्ति दे दी थी।

इंटरनेट से लिया गया एक चित्र 

दौड़ते- दौड़ते सोचने लगा कि  क्या है मैराथन , क्या सिर्फ ये दौड़ है या कुछ और ........ जवाब भी अंदर से ही मिलने थे। जीवन की अनेक कठिनाईओ का सामना ही तो है मैराथन.. और दौड़ना मतलब उन समस्याओ से लड़ना। जिंदगी है तो समस्याये  तो रहेगी ही , पर हम आने वाली कठिन चुनौतियों  का मुकाबला  किस प्रकार करते है इस नजरिये मे बदलाव लाता  है यह मैराथन। फर्क  है तो बस इतना कि  ये मैराथन दौड़ दिखाई दे रही है। मैराथन दौड़ जैसी  शारीरिक परीक्षा से मानसिक  मजबूती  भी मिलती है  और मजबूत इरादों से कठिन लक्ष्यों  को पार करने का साहस भी।  दौडते-दौड़ते बस अपने आप से यूँ  ही बाते किये जा रहा था।  सवाल और जवाब दोनों हमारे। मुझे अपने एक दोस्त की कही बात अचानक याद आयी -आपकी किस्मत आपको मौका देगी , पर आपकी मेहनत  सबको चौंका  देगी।  

खैर , भागते-भागते वो घडी भी आयी जब 35 किलोमीटर पुरे किये और मुझे इससे जुड़ा सारा किस्सा याद आ गया।  मेरी मिनी मैराथन भीगी-भीगी बारिश वाली  .............  खाते -पीते दौड़ते रहे और आखिरकार हम अपनी मंजिल से केवल एक मोड़  दूर थे और उस मोड़  से दूर से ही मैराथन समाप्ति का गेट दिखाई देता था। 

वो मैराथन समाप्ति के आखिरी चंद कदम -

शायद  इस अंतिम कड़ी मे मै माँ सरस्वती से प्रार्थना  कर रहा हूँ कि  हे माँ! मुझे शक्ति  दे  जिससे मैं  अपने मन के भावों  को कलम मे  पिरो सकूँ -

वो अन्तिम मोड़ औरो की तरह मेरे लिए एक आम मोड़  नहीं था।  मुझे मुड़ते ही जैसे गेट दिखाई दिया तो मानो  दिल मे  अरमानो का एक ज्वालामुखी फूट गया हो।  बड़ा ही भावुक पल था वो मेरे लिए। उन चंद  लम्हो की दूरी मे मैंने  एक जिंदगी  जी ली थी। जिस दिन के लिए मैने इतनी  मेहनत  की  थी।  वो मंजिल वाला गेट बाहें  फैलाए  मुझे ऐसे बुला रहा था जैसे एक माँ  अपने बेटे  को गोद  मे  लेने के लिए बैचैन  हो और   शायद  उससे कही ज्यादा उसका बेटा...........  सब कुछ तो तैर गया था आँखों के सामने पूरी एक फिल्म की तरह  ...

इंटरनेट से लिया गया एक चित्र 

जिंदगी का वो बेहतरीन लम्हा अब कीर्तिमान बनाने के चरम पर था जिसकी तमन्ना  हर धावक को होती है। बस  आँसू  छलके  ही नहीं थे , पर बाहर  निकलने मे  कोई कसर भी तो नहीं छोडी  थी उन्होने। पल-पल जीत की और बढ़ते हुए अपने खुशी  के आँसू  छुपाते हमने आख़िरकार गेट पार कर ही लिया।  मैंने अपनी यह मैराथन 5 घंटे 25 मिनट मे  पूरी की।  किला तो छोटी चीज थी  उस समय, ऐसा लगा  मानो एवरेस्ट पा  लिया हो।  अक्टूबर 2019 से फरवरी 2020 के  इन चार महीनो की मेहनत का फल मिल गया था आज।  मन ने गुरु जी को दिल से याद करके धन्यवाद दिया।  एक विशेष बात दूँ , गुरु जी की गुरु दक्षिणा दिया जाना अभी बाकी  है।

जीत के अद्भुत पल 

जैसे ही दौड़ खत्म  हुई , पैरों  के साथ-साथ पूरा शरीर दर्द से कराह उठा।  दौड़ने के बाद किये जाने वाले व्यायाम करने की तो हिम्मत जवाब दे चुकी थी। मैडल के मिलते ही उस खुशी  के आगे वो दर्द फीका लगने लगा था। मेट्रो से घर तो पहुंचा, पर सफर  कैसे तय किया ये मेरी आत्मा ही जानती है।  10 मीटर की दूरी तय करने  मे  2 मिनट लग रहे थे। एक-एक कदम पहाड़  पर चढ़ने के बराबर लग रहा था।  जिसने मैराथन की हो वो इस दर्द को बखूबी समझ सकता है।

मैंने  फिनिशिंग गेट पर दौड़ते-दौड़ते एक क्लिप बनाई थी  उसे शेयर कर रहा हूँ कृप्या  इसे जरूर देखे।  इस मैराथन  सबसे बेहतरीन लम्हा था वो 

मैराथन की फिनिशिंग लाइन पर 


         मैराथन समाप्ति की ओर  बढ़ते कदम (अवश्य  देखे )



खैर , घर पहुंचे और यकीन मानिये वो उस रात हर करवट हर हिलडुल मे  शरीर का रोम-रोम कराह उठता , पर हम भी पैन किलर ना  लेने का पक्का इरादा  कर चुके थे।  आखिर उस दर्द मे  ही तो मैराथन की जीत की असली खुशी छुपी थी। कड़ी मेहनत  और पक्के इरादे से हम जीवन मे  कुछ भी हासिल कर सकते है. जरूरत है तो बस जज्बे की। 

  बस मन से किसी शायर  की लिखी हुई ये ही पंकितयाँ याद आ रही थी .........

अभी तो इस बाज की असली उड़ान बाकी  है , अभी तो इस परिंदे का इम्तिहान बाकी  है ,
अभी -अभी तो  मैने लांघा है समुन्द्रो को , अभी तो पूरा आसमान  बाकि है 





                                                                                                                                 अमित सिलावट 


अगर इस कहानी ने आपके दिल को छुआ हो , आपको इससे प्रेरणा मिलती हो तो कृप्या  अपने कमेंट्स  जरूर दें। 

धन्यवाद 

Comments

  1. Feeling proud to be a friend like you

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    1. thanks a lot for your kind appreciations words

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    2. Very nice Amit G really u did a great job

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    3. aabhar aapka. thanks a lot

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  2. Behtreen, shabdo ka chayan gazab, aur zazbe ko salaam, well done.

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    1. अति सुंदर, प्रेरणा दायक मैराथन की कहानी

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  3. You are idol of motivation to us. Inspired of your story. You can do anything. Great congratulations

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    1. thanks for your kind words of appreciation

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  4. Superb Sir!!
    shabd nahi hai tareef ke liye.!

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  5. अमितजी आपने बहुत अच्छा लिखा । आपको मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ ।

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  6. Amitji great inspring story, very nicely written, congratulations

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  7. Wow Amit dear
    You are great and story' is awesome

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  8. As I always admire your writing skills, while reading this story I was feeling like I myself was running with u. Nicely written, wonderful presentation with stills & relevant symbolics and motivational quotes.

    मां सरस्वती की असीम कृपा है आप पर।
    तुम कलम के सच्चे सिपाही हो दोस्त।

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  9. Salute to you amit ji. Jitane ache runner ho, usse bhi ache writer ho.

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    1. I am blessed with ur kind words of appreciation

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  10. अद्भुत और प्रशंसनीय

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  11. अमित जी, वाकई रोचक, अद्भुत और प्रेरणा दायक अनुभव जो आपने लेखनी से कलमबद्ध किया बहुत ही सुन्दर व सराहनीय है।
    अच्छे व सफल प्रयास के बाद मैराथन सफलतापूर्वक पूरा करने की, जीवन में लक्ष्य को कैसे प्राप्त करें और उसे पाने के लिए कैसे प्रयत्न करें, ऐसी प्रेरणा देने के लिए बहुत बहुत बधाई और धन्यवाद ।

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  12. Bahut Sundar likhte ho.......paani par malai chadha dete ho....

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  13. Very appricable achivement that inspire from the core of heart.
    Wedone.

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  14. Amit, great achievement, very inspiring and also salute your writing skill. While reading story i never found that it has been written by an unprofessional person. Great keep it up.

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  15. भाई साहब मेरी उम्र 50 + है मै डेली मॉर्निंग मे 7 Km दौड़ता हूं लेकिन आपकी कहानी सुनकर लगता है की मुझे भी 21/42 Km वाला अभ्यास करना चाहिये।मैराथन तो नही दौड़ सकता लेकिन अकेले मे भी दौड लेना परम आंतरिक शक्ति का अह्सास कराता है। धन्यवाद
    अजय प्रकाश गौर
    मुख्य लोको निरीक्षक लखनऊ

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  16. Awesome example of commitment and courage. An inspiration for all. The killing instinct that you have displayed is examplary. Extraordinary effort. Society takes pride to have strong people like you. Equally commendable is the narration and presentation.

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  17. Amit ji , Aap Marathon ke Sipahi toh ho.
    Eske saath aap Kalam ke Sipahi bhi ho.
    May God give you more strength to fulfill your Dreams and aspirations.
    God Bless you !!!

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  18. Amit ji aapka ya block bahut prernadayak hai ummid rakhte Hain ki aap ki Prerna dusron ke liye ek Prerna strot Hogi

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  19. अमित जी आपने जो ब्लॉक लिखा हो सभी के लिए एक बहुत ही अच्छा मिसाल है

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  20. आपकी मेराथन और हौसला तो काबिले तारीफ है ही, लेकिन ऐसी लेखनी, यादों के सजीव चित्र और बातों स्पष्टता ने अधिक मन मोह लिया।

    आपका लिंक डॉक्टर नमित शर्मा के hdor whatsapp ग्रुप से मिला था।

    दौड़ते रहिए, लिखते रहिए।

    शभकामनायें।


    संजीव खीचड़

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    1. I m blessed with Ur kind words of appreciation.. Regards

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  21. आपकी यह यात्रा पढ़ कर मानो ऐसा लग रहा कि शरीर मे एक अजीब सी ऊर्जा का आगमन हुआ है ओर कुछ करने की हिम्मत मिल गयी हो, आपकी यह यात्रा पढ़ के बाद मन में विचार आ ही गया कि एक दिन में भी आपकी ही तरह यह मैराथन को पूरा करु
    आपके शब्दों का चयन बहुत प्यारा ह भगवान से प्राथन ह की आपकी कलम इसी तरह व्यक्ति के जीवन मे ऊर्जा भरती रहै
    आपका बहुत बहुत आभार अमित जी
    अजय शर्मा ( लॉ का विद्यार्ति )

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    1. Great thanks for Ur kind words of appreciation

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  22. Dear Amit Ji,
    Hats off to your motivation .I got goosebumps while reading your story. It even inspired me to run a marathon as well.
    "Manav jab jod lagaata hai pathar paani ho jaata hai"

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  23. शानदार लिखा है अमित जी। ऐसी ही कुछ कहानी मेरी भी है लेकिन मैं उसको शब्द नहीं दे सका। अब मैं भी लिखूंगा। आपको बहुत बहुत शुभकामनाएं। कई लोगों को हौसला देगी आपकी कहानी।

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    1. Thanks a lot for Ur kind words of appreciation

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  24. Wow...Very nicely penned down...👌👌👌

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  25. Really appreciate of your hard work.

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  26. Really appreciate of your hard work.

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  27. साहब और क्या क्या छुपा रखा है अपने, भगवान ने एक इंसान में इतने टैलेंट कैसे भर रखे हैं। अद्भुत अकल्पनीय अदिवत्य
    I love❤ you yaar

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  28. bahut ache shabd aur apke jazbe ko salam sir

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  29. समा बाँध दिया अमित भाई यहाँ भी आपने... गजब दौड़ते हो और उससे भी ज्यादा गजब लिखते हो... ईश्वर से प्रार्थना है आप ऐसे ही दौड़ते रहो और हमे भी आपसे प्रेरणा मिलती रहे.... शुभकामनाएं

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  30. Such an inspirational, motivational and heart touching story..Proud to be an Indian as India is having citizens like you..hatsoff..✌️✌️
    Keep it up Sir..👍👍...keep running keep shining 🙃🙃

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  31. Being a Runner 🏃, you are such a great writer who writes with all of his heart. The pictures & videos that you have added make this post alive.
    Your real-life story is very inspiring for me, please write more such inspiring blogs. You are a great Writer & Selfless person.

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    1. Sir, thanks a lot for ur kind and valuable words

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  32. Dear Amit Ji,
    It's really very inspirational for everyone. Fabulous, esp. you have done while residing in Metro City as, here Time is most Prime in view of substantial time of your day is consumed in local computation. Please keep it up.
    Our best wishes for all your future endeavours !!

    S.K. Gupta

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  33. Great Bro.. Beautiful narration and pics and videos too..
    I am lacking words to express my happiness and at the same time my gratitude for being a Mentor for me..
    I know that I am not a good student like you..

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  34. You are a Super Motivator Now. And Hats off to your entire Journey of Running and Completing Marathon

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  35. You are a genius and super human being.. With govt. Job you are living your dreams... To the fullest.. We all will motivate from your journey.

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    1. Sir, Thanks a lot for your kind comment

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  36. Hard Work Pays Off Sir;

    Congratulations on your incredible achievement Sir! Running a marathon is not just about reaching the finish line—it’s about the countless hours of dedication, discipline, and perseverance that led you there.

    Your journey is an inspiration, showing that with commitment and passion, anything is possible. Keep pushing boundaries and chasing your dreams—this is just the beginning of many more victories to come!

    I truly admire your dedication, and I’m so proud of you Sir.

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  37. Amit ji This is clear by only reading this (I have not met in person) that you are a person of very strong mind. You can achieve wonders. On the other part you are a wonderful writer as well. You have compiled the great motivational thoughts in your blog. I am also taking participation in Marathon from 2014. But after corona.. there was gap in Practice. but after reading this...you have ignited fire.

    Thanks Amit Sir...

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  38. Sir, Great thanks for kind words of appreciation

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  39. "Mr. Amit Silwat G sir is not just a fitness enthusiast — he’s a true beacon of hope for countless people. Jinhone chalna tak chhod diya tha, jinhe lagta tha ke bimariyon ke baad zindagi sirf rukna hi hai — un sabko Amit ji ne na sirf motivate kiya, balki jeene ka naya rasta dikhaya. Running, walking, cycling – ye sirf physical activities nahi, ek nayi zindagi ki shuruaat ban gayi un logo ke liye, jinhe Amit ji ne inspire kiya. Aap sach mein ek misaal hain – salute to your dedication and selfless efforts!"

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    Replies
    1. Thanks a lot for your kind words of appreciation.

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